श्री रामायण प्रारम्भ स्तुति Lyrics

जो सुमिरत सिद्धि होइ गुण नायक करिबर बादन
कर कृपा सोई बुद्धि रसी सुभ गुण घर..

मौन होई निःसन्तान कवा आरोहण गिरिबार गभीर।
जसु कृपान सो दयाल द्रवु स्थूल की माल दहन।

नील सरोरुह सियाम तरुण अरुण बरिज नयन।
कारु सो मम उर धम् सदा छिरसागर स्यान्..

कुण्ड इन्दु सुम देह उमा रमण करुण आयन।
जाहि दिन पर नः करु कृपा मरदान मयान..

बन्धु गुरु पद कंज कृपा सिन्धु नरूप हरि।
महामोह तम पुंज जसु बचन रबी कर निकार निकर..

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