सतरी संगत सुख धारा राजस्थानी भजन लिरिक्स

सतरी संगत सुख धारा, दोहा – सतसंग यु समझा रही,के ले सतगुरु री ओट,सतगुरु बिना मिले नही,बीरा थारा मन री खोट।थारा मन री खोट,मुर्ख क्यु जनम गमावे,अरे सतसंग यु समझा…

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