अपने मन की कोरी चुनरिया

अपने मन की कोरी चुनरिया, द्वार तुम्हारे लाउ
अपने मन की कोरी चुनरिया, द्वार तुम्हारे लाउ
अपना चढा दौ रंग है सांइ, इतना ही मैं चाहु
अपने मन की कोरी चुनरिया, द्वार तुम्हारे लाउ

तुमने मुझको सदगुरु सांइ, भक्ति य़ोग्य बनया
मैं मुरख ना समजा तुमको
व्यर्थ हि समय गवाहय
हैं सांइ मैं द्वार तुम्हारे
दुखडे आपने सुनाउ
अपने मन की कोरी चुनरिया, द्वार तुम्हारे लाउ
अपने मन की कोरी चुनरिया, द्वार तुम्हारे लाउ

सद संगत ना भाई मुझको
मुझको माया भाई
चंचल माया ने भी मेरी
राह प्रभो भटकाइ
हैं सांइ मैं कब तक जग मैं
दर दर ठोकर खाउ
अपने मन की कोरी चुनरिया, द्वार तुम्हारे लाउ
अपने मन की कोरी चुनरिया, द्वार तुम्हारे लाउ

मंन के तारो मैं हैं सांइ
सरगम तुम बन जाओ
सा – से – सा तक बनके सांइ
क़ंठ मैं तुम बस जाओँ
महिमा तुम्हारी गा गा करके
तुमको आज सुनाउ

अपने मन की कोरी चुनरिया, द्वार तुम्हारे लाउ
अपने मन की कोरी चुनरिया, द्वार तुम्हारे लाउ
अपना चढा दौ रंग है सांइ, इतना ही मैं चाहु
अपने मन की कोरी चुनरिया, द्वार तुम्हारे लाउ

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