दॊहा – 2

जल से दीपक जल गये पानी हॊ गया तेल – 2
खारा जल मीठा किया साई के सब खेल – 2
साई सुमिरण जॊ करे वॊह निर्भ्य हॊ जाये – 2
उसकी झूठी वासना चिर निद्रा सॊ जाये – 2

घर घर भिक्षा माङते शिरडी के भगवान – 2
भिक्षा ले देते हमे सुख शान्ती सनमान – 2
नीम व्रिक्ष पावन किया करकॆ गुरू का ध्यान – 2
कडवे पात्ते हॊ गयॆ बिलकुल शहद समान – 2

बाबा तॊ ऐसे सखी देते जीवन दान – 2
अन्धे कॊ आन्खे मिले निर्धन हॊ धनवान – 2
मजजिद मे धूनी जले मन्दिर मे अजान – 2
शिरडी साईधाम मे कर सजदा और ध्यान – 3

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