म्हारी खेड़ादेवी रे द्वार दिवला जाग्या रे

म्हारी खेड़ादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे।

दोहा – दिवला जाग्या चोक मे,
मारी खेडादेवी रे द्वार,
दर्शन आया यात्री,
माँ बालक ने नार।

म्हारी खेड़ादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे,
मारी खेडादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे,
हालो हालो रे भगतो,
हालो दर्शन करलो रे,
हालो हालो रे भगतो,
हालो दर्शन करलो रे,
मारी खेडादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे।।

अरे सुमेरपुर रे माय,
खेडादेवी बिराजे रे,
अरे सुमेरपुर रे माय,
खेडादेवी बिराजे रे,
अरे दिन दुखी रा कारज,
मैया सारे रे,
अरे दिन दुखी रा कारज,
मैया सारे रे,
मारी खेडादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे।।

अरे इन कलयुग रे माय,
आसरो थारो रे,
इन कलयुग रे माय,
आसरो थारो रे,
मारी खेडादेवी जोगमाया,
दर्शन देवो रे,
मारी खेडादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे।।

ढोल नगाड़ा थारा,
मंदिर बाजे रे,
अरे ढोल नगाड़ा,
थारा मंदिर बाजे रे,
ए जग कल्याणी मात,
किरपा किजो रे,
मारी खेडादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे।।

अरे भगत मंडली माँ,
महीमा गावे रे,
मारी खेडादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे।।

म्हारी खेड़ादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे,
मारी खेडादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे,
हालो हालो रे भगतो,
हालो दर्शन करलो रे,
हालो हालो रे भगतो,
हालो दर्शन करलो रे,
मारी खेडादेवी रे द्वार,
दिवला जाग्या रे।।

राजस्थानी भजन म्हारी खेड़ादेवी रे द्वार दिवला जाग्या रे

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