शिवजी बिहाने चले पाल्की सजाय्के

बोम बोम भोला -४

हो शिवजी बिहाने चले पाल्की सजाय्के
भभुति लगाये के ला

ओ शिवजी बिहाने चले पाल्की सजायके
बाभूति लगाये के पाल्की सजायके ला

ओ जब शिव बाबा करे तैयारी कैके सकल समान हो
डैने अंग त्रिशूल विराजे नाचे भुत शैतान हो
ब्रह्मा चलें विष्नू चलें लै के वेद पुराण हो
शंख चक्र और गदा धनुष लै चलें श्री भगवान हो
और बन-ठन के चलें बोम भोला लिए भांग धातूर का गोला
बोले ये हरदम चले लड़का पराई के

बाभूति लगाये के पाल्की सजायके ला …
होई आयी होई आया
आ आ आ आ आ आ

माता मतदिन पर चंचल ली तिलक जली लीलार हो
काला नग गर्दन के नीचे वोहू दिलन फूसकार हो
लोता फेंक के भाग चलैली ताविज निखल लीलार हो
इन की संगी बाहन कर गो गौरी रही कुँवारी हो
कहे पर्वती समझायी बतिया मानो हमरो माई
जै भरैले हाँ हम कर्मवा लीठा के

बाभूति लगाये के पाल्की सजायके ला …
ओम नमहा शिवाय
ओम नमाह स्वाहाय

ओ जब शिव बाबा मड़वा गैले होला मंगला चार हो
बाबा पंडित वेद विचारे होला गुस्सा चार हो
बजरबटी की लगी झालरी नागिन की अधिकार हो
विज मड़वा मे नावन ऐली करे झंगन वड़ीयार हो
ए गो नागिन गिले विदाई नावन गिऊले चले बराती
चलें देवता ठठाय के

बाभूति लगाये के पाल्की सजायके ला …
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ

तो कोमल रूप धरे शिव-शंकर खुशी भये नर-नारी हो
राजही नाचन गान कराइले इज्जत रहें हमार हो
रहे वर साथी शिव-शंकर से केहू के न पावल पार हो
इन के जटा से गंगा बहली महिमा अगम अपार हो
जै शिव-शंकर ध्यान लगाये इन के तीनों लोग दिखाये
कहे दुःख हरण यही छडो बनोवा के

बाभूति लगाये के पाल्की सजायके ला …

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