भाई जीते जी त सड़या र खाट में हरयाणवी भजन

भाई जीते जी त सड़या र खाट में,
इब मरया नहवायें के होगा,
और टेम प रोटी देयी ना खाण ने,
यो गाम जयमायें के होगा।।

सुबह शाम तन्नै एक घड़ी भी,
पैर भी दबाए ना,
कड़वा बोल सदा तुं बोलया,
सुख के टुक खवाए ना,
इब धर क फोटु आगः र भाईयो,
फुल चढ़ाएं के होगा,
टेम प रोटी देयी ना खाण ने,
यो गाम जयमायें के होगा।।

टुटे लितर मैले कपड़ै,
कदे धोणे का काम नहीं,
टुटी खाट प पाटया गुदड़ा,
जिप सोणे का काम नहीं,
आज बणा समाधी खेतां के महां,
यो चीर उढ़ाएं के होगा,
और टेम प रोटी देयी ना खाण ने,
यो गाम जयमायें के होगा।।

मात पिता का बदला र भाईयो,
किसे जन्म ना तारया जा,
करता दगा जो इनके संग में,
वो बिन आई में मारया जा,
आज कर क याद पाछली बातां ने,
यो नीर भहायें के होगा,
टेम प रोटी देयी ना खाण ने,
यो गाम जयमायें के होगा।।

हरियाणे के जिले रोहतक में,
इसा मिलणा गाम समाल नहीं,
गुरू रामसिंह धोरः रहता,
कप्तान शर्मा काल नहीं,
हर का गाणा गाया ना कदे,
यो मुंह बांए त के होगा,
और टेम प रोटी देयी ना खाण ने,
यो गाम जयमायें के होगा।।

भाई जीते जी त सड़या र खाट में,
इब मरया नहवायें के होगा,
और टेम प रोटी देयी ना खाण ने,
यो गाम जयमायें के होगा।।

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