होली के भजन लिखित में

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मनड़ो झूम उठ्यो फागण में चालो साँवरिया के द्वार लिरिक्स

मनड़ो झूम उठ्यो फागण में,
चालो साँवरिया के द्वार,
मनड़ों झूम उठ्यो,
होली के मिस श्याम धणी से
करस्या बाता चार,
मनड़ो झूम उठ्यो

म्हारी पहली बात साँवरा,
दया बणाई राखो जी,
थारी दया बिन सुनो सुनो,
थारी दया बिन सुनो सुनो,
लागे यो संसार,
मनड़ों झूम उठ्यो,
मनड़ों झूम उठ्यो फागण में,
चालो साँवरिया के द्वार,
मनड़ों झूम उठ्यो।।

बात दूसरी रंग जावा मैं,
थारे रंग में साँवरिया,
थे चाहो तो सब कुछ हो जा,
थे चाहो तो सब कुछ हो जा,
करो श्याम स्वीकार,
मनड़ों झूम उठ्यो,
मनड़ों झूम उठ्यो फागण में,
चालो साँवरिया के द्वार,
मनड़ों झूम उठ्यो।।

सदा राख चरणा के माही,
आती जी अरदास मेरी,
तेरी सेवा करता करता,
तेरी सेवा करता करता,
होजा जीवन पार,
मनड़ों झूम उठ्यो,
मनड़ों झूम उठ्यो फागण में,
चालो साँवरिया के द्वार,
मनड़ों झूम उठ्यो।।

‘मातृदत्त’ की चौथी बात या,
श्याम सुंदर धर ध्यान सुनो,
पग पग म्हारी रक्षा करियो,
पग पग म्हारी रक्षा करियो,
ओ लीले असवार,
मनड़ों झूम उठ्यो,
मनड़ों झूम उठ्यो फागण में,
चालो साँवरिया के द्वार,
मनड़ों झूम उठ्यो।।

मनड़ो झूम उठ्यो फागण में,
चालो साँवरिया के द्वार,
मनड़ों झूम उठ्यो,
होली के मिस श्याम धणी से
करस्या बाता चार,
मनड़ो झूम उठ्यो।।

प्रेम रंग से भरी ये ब्रज की होरी लागे भजन लिरिक्स

प्रेम रंग से भरी ये ब्रज की होरी लागे,

दोहा – कान्हा पे रंग डारने,
गोरी राधिका आई,
रंग भरी वो प्यार के,
भर पिचकारी लाई।

प्रेम रंग से भरी ये ब्रज की होरी लागे,
ब्रज की होरी लागे,
कान्हा को तो लाल करने की तैयारी लागे।।

मुरली मनोहर कारे कारे,
राधा गोरी गोरी,
कान्हा के संग खेलन आई,
बरसाने की होरी,
राधे और मोहन की,
हाँ राधे और मोहन की,
जोड़ी प्यारी लागे,
जोड़ी प्यारी लागे,
कान्हा को तो लाल करने की तैयारी लागे,
प्रेम रंग से भरी ये ब्रज की होली लागे,
ब्रज की होरी लागे,
कान्हा को तो लाल करने की तैयारी लागे।।

ग्वाल बाल और सखियों ने भी,
कर ली है तयारी,
बच ना पाए होरी में तो,
कोई भी इस बारी,
फागुन माह की छटा तो,
फागुन माह की छटा तो,
बडी न्यारी लागे,
बडी न्यारी लागे,
कान्हा को तो लाल करने की तैयारी लागे,
प्रेम रंग से भरी ये ब्रज की होली लागे,
ब्रज की होरी लागे,
कान्हा को तो लाल करने की तैयारी लागे।।

आओ भक्तो इस होरी में,
तुम भी तन मन रंग लो,
रंगों की इस होरी में,
प्रेम रंग तुम भर लो,
सारी दुनिया राधे मोहन,
सारी दुनिया राधे मोहन,
की पुजारी लागे,
हाँ पुजारी लागे,
कान्हा को तो लाल करने की तैयारी लागे,
प्रेम रंग से भरी ये ब्रज की होली लागे,
ब्रज की होरी लागे,
कान्हा को तो लाल करने की तैयारी लागे।।

प्रेम रंग से भरी ये ब्रज की होरी लागे,
ब्रज की होरी लागे,
कान्हा को तो लाल करने की तैयारी लागे।।

बरसाने में आज धूम मची होली की भजन लिरिक्स

बरसाने में आज धूम मची होली की,
धूम मची होली की, धूम मची होली की,
बरसानें में आज धूम मची होली की।।

रंग रंगीलो फागुण आयो,
ब्रज वासी को मन हर्षायो,
रंग रंगीलो फागुण आयो,
ब्रज वासी को मन हर्षायो,
नाचे दे दे ताल,
धूम मची होली की,
बरसानें में आज धूम मची होली की।।

नन्द गाँव से ग्वाला आये,
सुन्दर ढाल संग में लाये,
नन्द गाँव से ग्वाला आये
सुन्दर ढाल संग में लाये,
उड़त अबीर गुलाल,
धूम मची होली की,
बरसानें में आज धूम मची होली की।।

इत है नन्द गाँव के रसिया,
उत है बरसाने की सखियाँ,
इत है नन्द गाँव के रसिया,
उत है बरसाने की सखियाँ,
कर सोलह श्रृंगार,
धूम मची होली की,
बरसानें में आज धूम मची होली की।।

गली रंगीली शोभा न्यारी,
ग्वालन पड़ रही लठियाँ भारी,
गली रंगीली शोभा न्यारी,
ग्वालन पड़ रही लठियाँ भारी,
हो रही जय जयकार,
धूम मची होली की,
बरसानें में आज धूम मची होली की।।

या बृज की होली को देखन,
चढ़ आये सुर देव विमानन,
या बृज की होली को देखन,
चढ़ आये सुर देव विमानन,
करे फूलन की बौछार,
धूम मची होली की,
बरसानें में आज धूम मची होली की।।

बरसाने में आज धूम मची होली की,
धूम मची होली की, धूम मची होली की,
बरसानें में आज धूम मची होली की।।

आजा आजा होली खेल साडे नाल सांवरे भजन लिरिक्स

आजा आजा होली खेल साडे नाल सांवरे,

दोहा – किसी के हाथ में ढोलक छेना,
और किसी के हाथ में चंग,
बाहर निकल कर आजा सांवल,
होली खेलेंगे तोरे संग।

फागुण आया सारे लाए है गुलाल सांवरे,
आजा आजा होली खेल साडे नाल सांवरे,
हाथो में लेकर आए है निशान सांवरे,
आजा आजा होली खेल साडे नाल सांवरे।।

लाए भर भर के पिचकारी,
ये पक्के रंग की सारी,
मंदिर से बाहर आजा,
क्यो करता है होशियारी,
आज चलेगी ना कोई तेरी चाल सांवरे,
आजा आजा होली खेल साडे नाल सांवरे।।

तू मुरली मधुर बजाए,
हम चंग मंजीरा लाए,
लेने फागुण की मस्ती,
सब तेरे द्वार पे आए,
होगी तेरे संग खाटू में धमाल सांवरे,
आजा आजा होली खेल साडे नाल सांवरे।।

हाथो में निशान उठाके,
अबीर गुलाल उड़के,
घेरा भक्तो ने तुझको,
अब कहा छुपेगा जाके,
‘सतविंदर’ बिछाए ऐसा जाल सांवरे,
अब मीठी मीठी बातो से ना टाल सांवरे,
आजा आजा होली खेल साडे नाल सांवरे।।

फागुण आया सारे लाए है गुलाल सांवरे,
आजा आजा होली खेल साडे नाल सांवरे,
हाथो में लेकर आए है निशान सांवरे,
आजा आजा होली खेल साडे नाल सांवरे।।

अपने रंग मे रंग लो प्रीतम करके बहाना होली का

अपने रंग मे रंग लो प्रीतम,
करके बहाना होली का,
कैसे कहूँ मै अपने मुख से,
विषय नही यह बोली का।।

नीला पीला हरा गुलाबी,
रँग नही यह चाहूँ मै,
अँग अँग मे रँग भरदो प्रीतम,
लालो लाल हो जाऊँ मै,
ऐसा रँग चढ़ा दो प्रभू जी,
याद रहे दिन होली का,
अपने रंग मे रँग लो प्रीतम।।

कबिरा मीरा और शबरी को,
जैसा रँग चढ़ाया है,
नस नस मे वो नशा जगादो,
जो प्रहलाद ने पाया है,
यमराजा भी रोक सके न,
देख के रँग मेरी डोली का,
अपने रंग मे रँग लो प्रीतम।।

रँगना हो तो ऐसा रँगना,
रँग कभी जो छूटे ना,
राम रतन धन मुझे भी दे दो,
जो खर्चे से खूटे ना,
तेरा मेरा रहे ये रिश्ता,
जैसे चाँद चकोरी का,
अपने रंग मे रँग लो प्रीतम।।

अपने रंग मे रंग लो प्रीतम,
करके बहाना होली का,
कैसे कहूँ मै अपने मुख से,
विषय नही यह बोली का।।

फागण में उड़े रे गुलाल के आओ होली खेला जी लिरिक्स

फागण में उड़े रे गुलाल,
के आओ होली खेला जी,
के आओ होली खेला जी,
खाटू में मची रे धमाल,
के आओ होली खेला जी,
फागुण में उड़े रे गुलाल,
के आओ होली खेला जी।।

भक्ता को है मन हर्षायो,
भक्ता को है मन हर्षायो,
रंग प्रेम को थाने लगायो,
रंग प्रेम को थाने लगायो,
रंग चढ़ गया प्रेम कमाल,
के आओ होली खेला जी,
फागुण में उड़े रे गुलाल,
के आओ होली खेला जी।।

साँवरिया सागे खेला होली,
साँवरिया सागे खेला होली,
दूर दूर सू आई है टोली,
दूर दूर सू आई है टोली,
होली खेला बाबा श्याम,
के आओ होली खेला जी,
फागुण में उड़े रे गुलाल,
के आओ होली खेला जी।।

चंग ढोलक की थाप है बाजी,
चंग ढोलक की थाप है बाजी,
हो गयो श्याम धनी म्हारो राजी,
हो गयो श्याम धनी म्हारो राजी,
‘पगली’ नाचे दे दे ताल,
के आओ होली खेला जी,
फागुण में उड़े रे गुलाल,
के आओ होली खेला जी।।

‘देव’ भी खुश हो श्याम ने मनावे,
‘देव’ भी खुश हो श्याम ने मनावे,
‘राही’ श्याम के रंग रंग जावे,
‘राही’ श्याम के रंग रंग जावे,
बाबो हो गयो काले से लाल,
के आओ होली खेला जी,
फागुण में उड़े रे गुलाल,
के आओ होली खेला जी।।

फागण में उड़े रे गुलाल,
के आओ होली खेला जी,
के आओ होली खेला जी,
खाटू में मची रे धमाल,
के आओ होली खेला जी,
फागुण में उड़े रे गुलाल,
के आओ होली खेला जी।।

कैसी होली श्याम मचाये रे भजन लिरिक्स

कैसी होली श्याम मचाये रे,
नाचे ब्रज के ग्वाल गोपिया,
ताल बजाये रे,
कैसी होली श्याम मचाये रे।।

एक तरफ है लाड़ली राधे,
दूजे कुंवर कन्हैया,
रंग गुलाल उड़ावे हिल मिल,
नाचे ताता थईया,
प्यारी बंसी श्याम बजाये रे,
नाचे ब्रज के ग्वाल गोपिया,
ताल बजाये रे,
कैसी होली श्याम मचाये रे।।

भर पिचकारी रंग कैसरिया,
सखियों पे बरसावे,
देख गुजरिया नई चुनरिया,
सारे शोर मचावे,
गोरी बच के निकल ना जाये रे,
नाचे ब्रज के ग्वाल गोपिया,
ताल बजाये रे,
कैसी होली श्याम मचाये रे।।

ढोल मजीरे बाज रहे है,
बाज रही शहनाई,
नन्दगाँव बरसाना गोकुल,
ब्रज के लोग लुगाई,
होली गाते चंग बजाये रे,
नाचे ब्रज के ग्वाल गोपिया,
ताल बजाये रे,
कैसी होली श्याम मचाये रे।।

कैसी होली श्याम मचाये रे,
नाचे ब्रज के ग्वाल गोपिया,
ताल बजाये रे,
कैसी होली श्याम मचाये रे।।

बाबा श्याम के दरबार मची रे होली भजन लिरिक्स

बाबा श्याम के दरबार मची रे होली,
बाबा श्याम के,
मची रे होली रे खेलांगा होली,
बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी,
बाबा श्याम के।।

केमण लाल गुलाल उड़त है,
केमण केसर कस्तूरी,
बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी,
बाबा श्याम के।।

सौमण लाल गुलाल उड़त है,
सौमण केसर कस्तूरी,
बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी,
बाबा श्याम के।।

कित्ता रे बरस को यो कुंवर कन्हैयो रे,
कित्ता रे बरस की या राधा गोरी,
बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी,
बाबा श्याम के।।

आठ बरस को यो कुंवर कन्हैयो रे,
सौलह रे बरस की या राधा गोरी,
बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी,
बाबा श्याम के।।

बाबा श्याम के दरबार मची रे होली,
बाबा श्याम के,
मची रे होली रे खेलांगा होली,
बाबा श्याम के,
बाबा श्याम के दरबार मची रे होरी,
बाबा श्याम के।।

श्याम से ऐसी होली हुई शरम से मैं मर गई भजन लिरिक्स

श्याम से ऐसी होली हुई,
शरम से मैं मर गई।।

मोहे अकेले श्याम ने घेरा,
हाथ पकड़ लिया कस के मेरा,
उसकी बाहों में कस गई,
शरम से मैं मर गई,
श्याम से ऐसी होली हुयी,
शरम से मैं मर गई।।

जोराजोरि से रंग लगाया,
हाय श्याम ने कितना सताया,
सिर से पाँव तक मैं रंग गई,
शरम से मैं मर गई,
श्याम से ऐसी होली हुयी,
शरम से मैं मर गई।।

छलिया ने मोहे रंग लगा के,
छोड़ दिया मोहे अंग लगा के,
उसकी बातों में मैं फस गई,
शरम से मैं मर गई,
श्याम से ऐसी होली हुयी,
शरम से मैं मर गई।।

सांवरिया ने ऐसा लुटा,
सारा अंग अंग मेरा टुटा,
जैसे नागन कोई डस गई,
शरम से मैं मर गई,
श्याम से ऐसी होली हुयी,
शरम से मैं मर गई।।

श्याम से ऐसी होली हुई,
शरम से मैं मर गई,
श्याम से ऐसी होली हुयी,
शरम से मैं मर गई।।

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