छोड़ वृंदा विपिन कुंज यमुना पुलिन श्याम मधुबन चले लिरिक्स

छोड़ वृंदा विपिन,
कुंज यमुना पुलिन,
श्याम मधुबन चले,
श्याम मथुरा चले।।

माँ यशोदा दुखित नन्द बाबा भए,
ग्वाल रोवे हमारे कन्हैया गए,
छोड़ सबसे लगन,
प्राण तन मन हरण,
श्याम मधुबन चले,
श्याम मथुरा चले।।

हाय मोहन बिना चैन कैसे पड़े,
कौन नवनीत माखन की चोरी करे,
गैया करती रुदन,
प्राण तन मन हरण,
श्याम मधुबन चले,
श्याम मथुरा चले।।

बीज विपदा के अक्रूर बो के चल्यो,
मेरी गोरी किशोरी को दुःख दे चल्यो,
क्यों लगाई लगन,
प्राण तन मन हरण,
श्याम मधुबन चले,
श्याम मथुरा चले।।

छोड़ वृंदा विपिन,
कुंज यमुना पुलिन,
श्याम मधुबन चले,
श्याम मथुरा चले।।

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