मेरी बात रखना जैसे मैं चाहूं वैसे ही मुझको नाथ रखना

कृष्ण भजन मेरी बात रखना जैसे मैं चाहूं वैसे ही मुझको नाथ रखना
गायक – उमाशंकर गर्ग
तर्ज – मेरी ाज रखना।

मेरी बात रखना,
जैसे मैं चाहूं,
वैसे ही मुझको,
नाथ रखना,
मेंरी बात रखना,
मेंरी बात रखना।।

ये तो मैं मानूं,
तू मुझको जानें,
पर ये ना जानूं,
तू कितना मानें,
हर पल ही मुझको,
दर पे तू दाता,
साथ रखना,
मेंरी बात रखना,
मेंरी बात रखना।।

मेरी जब से नैया,
ये डोल रही है,
दुनिया भी मुझको,
ये तोल रही है,
करता हूं विनती,
मेरी तू बाबा,
जात रखना,
मेंरी बात रखना,
मेंरी बात रखना।।

फूलों संग कांटे,
मिलते उपवन में,
ऐसे ही सुख दुःख,
रहते जीवन में,
फूलों के संग अब,
कांटे ना मेरे,
हाथ रखना
मेंरी बात रखना,
मेंरी बात रखना।।

हर रात बाद हो,
जग में उजियारा,
“जालान” कहे अब,
यूं दास तुम्हारा,
जीवन में मेरे,
यूंही ना बाबा,
रात रखना,
मेंरी बात रखना,
मेंरी बात रखना।।

मेरी बात रखना,
जैसे मैं चाहूं,
वैसे ही मुझको,
नाथ रखना,
मेंरी बात रखना,
मेंरी बात रखना।।

This Post Has 3 Comments

Leave a Reply