अरज सुणो जी म्हारा समराथल रा धणिया भजन लिरिक्स

अरज सुणो जी म्हारा,
समराथल रा धणिया,
आय विराजो म्हारे आगणियां,
म्हारा समराथल रा धणिया।।

लोहट जी बुलाया थे तो,
पीपासर में आया,
माता हंसा रो मान बढावणिया,
म्हारा समराथल रा धणिया,
अरज सुनो जी म्हारा,
समराथल रा धणिया।।

भगता ने बुलाया थे तो,
समराथल पर आया,
अमृत पाहल पिला वणिया,
म्हारा समराथल रा धणिया,
अरज सुनो जी म्हारा,
समराथल रा धणिया।।

बाजे जी बुलाया थे तो,
जसरासर में आया,
साधु मोवण लाया जागणिया,
म्हारा समराथल रा धणिया,
अरज सुनो जी म्हारा,
समराथल रा धणिया।।

उमा ने बुलाया थे तो,
रोटू नगरी में आया,
नवरंग चीर ओढावणीया
म्हारा समराथल रा धणिया,
अरज सुनो जी म्हारा,
समराथल रा धणिया।।

भक्त जन गुरुजी,
थारा गुण गावे,
बेड़ो पार लगावणीया,
म्हारा समराथल रा धणिया,
अरज सुनो जी म्हारा,
समराथल रा धणिया।।

अरज सुणो जी म्हारा,
समराथल रा धणिया,
आय विराजो म्हारे आगणियां,
म्हारा समराथल रा धणिया।।

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