अलख निरंजन निज निराकारी विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी

अलख निरंजन निज निराकारी,
विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी।।

निर्गुण से सिर्गुण हो आया,
ज्योति स्वरूप है आपकी माया।
अलख निरँजन निज निराकारी,
विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी।।

ब्रह्मा विष्णु महेश उपाया,
तीनो मिलकर आरम् थाया।
अलख निरँजन निज निराकारी,
विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी।।

संकादिक ऋषि प्रथम जाणो,
पीछे मानस पुत्र दस बखाणो।
अलख निरँजन निज निराकारी,
विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी।।

सिर्गुन आप दस अवतारी,
देवी दानव की रचना भारी।
अलख निरँजन निज निराकारी,
विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी।।

शशि भाण जो नो लख तारा,
रेण दिवस में करे उजियारा।
अलख निरँजन निज निराकारी,
विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी।।

गोकुल स्वामी सतगुरु दाता,
लादूदास शरण गुण गाता।
अलख निरँजन निज निराकारी,
विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी।।

अलख निरंजन निज निराकारी,
विभो नभ ज्यूँ अलख पसारी।।

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