आछी पाई ओ गुरूसा म्हाने ज्ञान गुटकी भजन लिरिक्स

राजस्थानी भजन आछी पाई ओ गुरूसा म्हाने ज्ञान गुटकी भजन लिरिक्स
स्वर – मोहनदासजी।

आछी पाई ओ गुरूसा,
म्हाने ज्ञान गुटकी,
ज्ञान गुटकी ओ शब्दों री गुटकी,
आच्छी पाई ओ गुरूसा,
म्हाने ज्ञान गुटकी।।

राम नाम री वाणी मैं तो,
पेला ही गिट गी,
सतगुरु हाथ धरिया सिर ऊपर,
चिन्ता मिट गी,
आच्छी पाई ओ गुरूसा,
म्हाने ज्ञान गुटकी।।

अनंत जन्म री भूल वासना,
भव भव में पटकी,
अब तो विरति अंतर लागी,
बायर से हटगी,
आच्छी पाई ओ गुरूसा,
म्हाने ज्ञान गुटकी।।

लख चौरासी पापों की मैं,
भरली मटकी,
सतगुरु दीन दया रा दाता,
मटकी ने पट की,
आच्छी पाई ओ गुरूसा,
म्हाने ज्ञान गुटकी।।

रामदास गुरु पूरा मिलिया,
दीवी सेन सत की,
समरथ राम सतगुरु सा रे शरणे,
चौरासी कटगी,
आच्छी पाई ओ गुरूसा,
म्हाने ज्ञान गुटकी।।

आछी पाई ओ गुरूसा,
म्हाने ज्ञान गुटकी,
ज्ञान गुटकी ओ शब्दों री गुटकी,
आच्छी पाई ओ गुरूसा,
म्हाने ज्ञान गुटकी।।

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