छतरी चाढे नी भाईडा घणो घणो तावडो पडे

राजस्थानी भजन छतरी चाढे नी भाईडा घणो घणो तावडो पडे
गायक – संत कन्हैयााल जी

छतरी चाढे नी भाईडा,
घणो घणो तावडो पडे,
तावडो पडे,
गौतमजी रो मेलो,
लम्बी नदियाँ मे भरे।।

ए अरे चार चार महिना,
आयो रे उनालो,
अरे चार चार महिना,
आयो रे उनालो,
उनाला री गरमी घणी जोर री पडे,
जोर री पडे,
भूरीया बाबा रो मेलो,
लम्बी नदीयाँ मे भरे।।

ए अरे चार चार महिना,
आयो रे चोमासो,
अरे चार चार महिना,
आयो रे चोमासो,
चोमासा रा मेवुडो घणो जोर को भरे,
जोर को भरे,
ए गौतमजी रो मेलो,
लम्बी नदीयाँ मे भरे।।

ए अरे चार चार महिना,
आयो रे सियालो,
अरे चार चार महिना,
आयो रे सियालो,
सियाला रा सर्दी घणी,
जोर री पडे,
जोर री पडे ए गौतमजी रो मेलो,
लम्बी नदीयाँ मे भरे।।

ए लम्बी लम्बी नदीयाँ मे,
गौतमजी रो मेलो लागे,
सगला चालो भगता,
चालो दर्न कर सुख पावो।।

ए अरे जल सेवा मीणा ग्रुप,
जागरण रखावे,
अरे जल सेवा मीणा ग्रुप,
जागरण रखावे,
पोसालीया नगरी मे मेलो,
जोर रो भरे जोर रो भरे,
गौतमजी रो मेलो,
लम्बी नदीयाँ मे भरे।।

छतरी चाढे नी भाईडा,
घणो घणो तावडो पडे,
तावडो पडे,
गौतमजी रो मेलो,
लम्बी नदियाँ मे भरे।।

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