छोटी सी थाकि चटी आंगली कईया गिरवर ने उठायो जी

छोटी सी थाकि चटी आंगली,

दोहा – मैं गरजी अर्जी करू,
थे सुणजो दीनानाथ,
आप बिना किसको कहूं,
मैं अंतकरण की बात।

छोटी सी थाकि चटी आंगली,
कईया गिरवर ने उठायो जी,
वा रे सांवरा,
कईया पर्वत ने उठायो जी,
ओ रे सांवरा।।

अजब निराली थारी माया,
जादू से भी ऊपर,
निज भगता रेे कारण आवो,
गव लोक पे उतर,
सुण जो बलदाऊ के भैया,
जल में डूबी जीवन नैया,
थे विका बण खेवईया,
लौहा रो मजबूत खम्भो,
फाड़ कर कईया नरसिंग रूप,
बणायो जी ओ रे सांवरा।।

एक दिन कौरव दुराचारी,
खोठी नियत विचारी,
पकड़ कर लाये द्रोपती नारी,
उने करबू छावे उगाड़ी,
अस्यो काही कामण थाने,
याद थो जी डूंगर साड़ी को,
बणायो जी वारे सांवरा।।

नानी बाई को भरयौ मायरो,
मीरा को जहर बचायो,
कर्मा के घर आकर प्रभुजी,
बास्यो खीचड़ खायो,
कबीरा के घर बालद लायो,
नाम दवरो छपरो छायो,
डूबती नैया मारी तार ज्यो जी,
थाने धन्नो भगत,
बुलावे जी वारे सांवरा।।

छोटी सी थाकी चटी आंगली,
कईया गिरवर ने उठायो जी,
वा रे सांवरा,
कईया पर्वत ने उठायो जी,
ओ रे सांवरा।।

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