पांचो आँँगलियां में राख दीयो फरको राजस्थानी भजन लिरिक्स

राजस्थानी भजन पांचो आँँगलियां में राख दीयो फरको राजस्थानी भजन लिरिक्स
गायक – रामकुमार मालुणी।

पांचो आँँगलियां में राख दीयो फरको,
खेल न्यारो ही देख्यो छ रघुवर को,
न्यारो ही देख्यो छ रघुवर को,
खेल न्यारो ही देख्यो छ रघुवर को।।

एक जीव चौरासी काया,
वहाँ से आया मीनक बणाया,
कोई भेद न पायो नटवर को,
खेल न्यारो ही देख्यो छ रघुवर को।।

खेल खिलौना की दुनिया बणादी,
राँख लियो वो खुद कन चाबी,
को न रयो रे भरोसो पल भर को,
खेल न्यारो ही देख्यो छ रघुवर को।।

समय सरू की लगाम बणायो,
बड़ा बड़ा पर दाव चलायो,
कोई घाट को राख्यो न कोई घर को,
खेल न्यारो ही देख्यो छ रघुवर को।।

गुण अवगुण यश अपयश सारा,
कर्म गति का खेल है न्यारा,
को न मालुनी खेल चतरंन को
खेल न्यारो ही देख्यो छ रघुवर को।।

पांचो आँँगलियां में राख दीयो फरको,
खेल न्यारो ही देख्यो छ रघुवर को,
न्यारो ही देख्यो छ रघुवर को,
खेल न्यारो ही देख्यो छ रघुवर को।।

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