भव सु पार उतारो गुरासा भजन लिरिक्स

भव सु पार उतारो गुरासा,

बंधीयो जीव मारो अशुभ कर्म में,
बंधीयो जीव मारो अशुभ कर्म मे,
माया रो बंधीयो जालो ए हा,
सोहन थाल भरीयो पृथ्वी मे,
सोहन थाल भरीयो पृथ्वी मे,
ज्यारो पकडो लारो गुरासा,
भव सु पार उतारों ए हा,
कदेनी भूलू गुण थारो गुरासा,
कदेनी भूलू गुण थारो गुरासा,
घट में दया विचारो ए हा।।

गुण है एक अवगुण घणा भरीया,
गुण है एक अवगुण घणा भरीया,
करनी रे सामी क्यो भालो ए हा,
मुझ पर महर करो मेरे दाता,
मुझ पर महर करो मेरे दाता,
बनकर हंस ऊबारो गुरासा,
भव सु पार उतारों ए हा,
कदेनी भूलू गुण थारो गुरासा,
कदेनी भूलू गुण थारो गुरासा,
घट में दया विचारो ए हा।।

इन्द्र आप मोर ज्यु मै हूँ,
इन्द्र आप मोर ज्यु मै हूँ,
बोलन रो हक है मारो ए हा,
मारी बोली पर नही बरसो तो,
मारी बोली पर नही बरसो तो,
नही लागे जोर हमारो गुरासा,
भव सु पार उतारों ए हा,
कदेनी भूलू गुण थारो गुरासा,
कदेनी भूलू गुण थारो गुरासा,
घट में दया विचारो ए हा।।

दुर्बल मै तो कहिजु राज रो,
दुर्बल मै तो कहिजु राज रो,
चाहे मारो चाहे तारो ए हा,
कहे दुराराम सेन सतगुरु री,
कहे दुराराम सेन सतगुरु री,
दिल में दया विचारो गुरासा,
भव सु पार उतारो ए हा,
कदेनी भूलू गुण थारो गुरासा,
कदेनी भूलू गुण थारो गुरासा,
घट में दया विचारो ए हा।।

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