मगरे मगरे बाबो गायो चरावे रे झीनी बजावे बंसरी

राजस्थानी भजन मगरे मगरे बाबो गायो चरावे रे झीनी बजावे बंसरी
गायक – संत कन्हैयालाल जी।

मगरे मगरे बाबो गायो चरावे रे,
झीनी बजावे बंसरी।।

ए आरा धोरी पर्वत भारी रे,
आरा धोरी पर्वत भारी रे,
बीच में गौतम जी वालो बेसनो,
बीच में गौतमी वालो बेसनो।।

ए गायो चरावे बाबो,
भजन कमावे रे,
गायो चरावे बाबो,
भजन कमावे रे,
मोटा मगरा रे मायने।।

ए अरे पाच पुलो री बाबा,
झूपडो बनायो रे,
पाच पुलो री बाबा,
झूपडो बनायो रे,
वनमे गोंगोजी वालो बेसनो,
वनमे गोंगोजी वालो बेसनो।।

ए अरे भूरी भूरी लटीया,
ने हाथ मायने चुटीयो,
भूरी भूरी लटीया ने,
हाथ मायने चुटीयो,
रामदेव दर्शन पावीया।।

ए गोंगोजी केवे सुनो महादेवजी,
ओ गोंगोजी केवे सुनो महादेव जी,
भोलेनाथ शब्दों में आवीया,
ए अरे केवे गोंगोजी सुनो महादेवजी,
अरे भगतो रे वचनो मे आवीया।।

ए अरे मारी गायो ने पानी पावो रे,
मारी गायो ने पानी पावो रे,
देवा बेरा मायने।।

ए सुखी नदीयाँ मे गंगा खलकाई,
सुखी नदीयाँ मे गंगा खलकाई,
अण कलयुग रे मायने।।

ए अरे गोंगवा रो मेलो पलके बेसावो रे,
गोंगवा रो मेलो पलके बेसावो रे,
मीणा समाज दर्शन आवता।।

अरे तीन दिनों रा बाबा वचन दिदा,
तीन दिनो रा बाबा वचन दिदा,
गंगा रेवेला थारे देवरे,
गंगा रेवेला थारे देवरे,
अरे दास कन्हैयो शरने,
हरजश गावे रे,
ए मेणो रो मेलो पलके बेसावो,
ए दर्शन आया थोरे देवरे।।

मगरे मगरे बाबो गायो चरावे रे,
झीनी बजावे बंसरी।।

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