मेरे मालिक की दुकान में सब लोगों का खाता भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
भाग बिना मिलता नहीं, भली वस्तु का जोग।
दाख भले वैशाख में, होवे कागे गले रोग।

मेरे मालिक के दरबार में,
सब लोगो का खाता।
जितना जिसके भाग में होता ,
वो उतना ही पाता।
मेरे मालिक की दुकान मे ,
सब लोगो का खाता।

क्या साधु क्या संत ग्रहस्ती ,
क्या राजा क्या रानी।
प्रभु की पुस्तक में लिखी है,
सबकी करम कहानी।
वही तो सबके जमा खर्च का,
सही हिसाब लगाता।
मेरे मालिक के दरबार में,
सब लोगो का खाता। टेर। …

बड़े कठिन कानून प्रभु के ,
बड़ी कठिन मर्यादा।
किसी को कोड़ी कम नहीं देता ,
किसी को तमडी ज्यादा।
इसीलिये तो दुनिया में ये ,
जगत सेठ कहलाता।
मेरे मालिक के दरबार में,
सब लोगो का खाता। टेर। …

करता है इंसाफ सभी के,
सिंहासन पर डट के।
उसका फैसला कभी ना टलता,
लाख कोई सर पटके।
समझदार तो चुप रहता है,
ओर मुर्ख शोर मचाता।
मेरे मालिक के दरबार में,
सब लोगो का खाता। टेर। …

नहीं चले उसके घर रिश्वत,
नहीं चले चालाकी।
उसके अपने लेन देन की,
रीत बड़ी है बांकी।
पूण्य का बेडा पार करे,
पापी की नाव डूबाता।
मेरे मालिक के दरबार में,
सब लोगो का खाता। टेर। …

अच्छी करनी करीयो लाला,
करम ना करीयो काला।
देख रहा है लाख आँख से,
तुझको ऊपर वाला।
सतगुरु संत से प्रेम लगा ले,
समय गुजरता जाता।
मेरे मालिक के दरबार में,
सब लोगो का खाता। टेर। …

मेरे मालिक के दरबार में,
सब लोगो का खाता।
जितना जिसके भाग में होता ,
वो उतना ही पाता।
मेरे मालिक की दुकान मे ,
सब लोगो का खाता।

मारवाड़ी चेतावनी भजन लिरिक्स
भजन :- मेरे मालिक की दुकान मे
गायक :- अनिल नागौरी
मेरे मालिक की दुकान में सब लोगों का खाता भजन लिरिक्स, mere malik ki dukan mein sab logon ka khata bhajan lyrics

anil nagori ke bhajan lyrics

mere malik ki dukan mein desi chetawani bhajan lyrics in English

mere malik ki dukan me ,
sab logo ka khata.
jitna jiske bhag me hota,
wo utan hi pata.
mere malik ki dukan me ,
sab logo ka khata.

kya sadhu kya sant grahsti,
kya raja kya rani.
prabhu ki pustak me likhi hai,
sabki karam kahani.
vahi to sabke jama kharch ka,
sahi hisab lagata.
mere malik ki dukan me ,
sab logo ka khata.

bade kathin kanun prabhu ke,
badi kathin maryada.
kisi ko kodi kam nhi deta,
kisi ko tamadi jyada.
esiliye to duniya me ye,
jagat seth kahlata.
mere malik ki dukan me ,
sab logo ka khata.

karta hai insaf sabhi ke,
sinhasan par dat ke.
uska faisla kabhi na talta,
lakh koi sar patke.
samajhdar to chup rahta hai,
or murakh shor machata.
mere malik ki dukan me ,
sab logo ka khata.

nhi chale uske ghar rishvat,
nhi chale chalaki.
uske apne len den ki,
reet badi hai baki.
punye ka beda par kare,
papi ki nav dubata.
mere malik ki dukan me ,
sab logo ka khata.

achchi karni kariyo lala,
karam na kariyo kala.
dekh raha hai lakh aankh se,
tujhko upar wala.
satguru sant se prem laga le,
samay gujrata jata.
mere malik ki dukan me ,
sab logo ka khata.

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