संतो भई मै बाबा बहुरंगी भजन लिरिक्स

राजस्थानी भजन संतो भई मै बाबा बहुरंगी भजन लिरिक्स
गायक – संत कन्हैयालाल जी।

संतो भई मै बाबा बहुरंगी,
अरे नही किसी से न्यारा रेवे,
अरे किसी के संग,
ओ संतो भई मै बाबा बहुरंगी।।

सत्त रा घोटा शील लंगोटा,
ज्यारी चादर है पचरंगी,
अरे सत्त रा घोटा शील लंगोटा,
ज्यारी चादर है पचरंगी,
नेम धर्म री पेडी खडावु,
नेम धर्म री पेडी खडावु,
अरे लाल रंग के संग संतो भई,
मै बाबा बहुरंगी।।

ए अरे खमीया रो खप्पर,
अरे जगत री झोली,
अलख घर भिक्षा मांगी,
अरे खमीया रो खप्पर,
अरे जगत री झोली,
अलख घर भिक्षा मांगी,
अरे संत से लिया संतोष कर पाया,
अरे संत से लिया संतोष कर पाया,
हो गया सरभंगी ओ संतो भई,
मै बाबा बहुरंगी।।

ए सोहन शिकर मे मठ है हमारा,
सुरता है अडरंगी,
अरे सोहन शिकर मे मठ है हमारा,
सुरता है अडरंगी,
अरे केवे सुरता सुनो स्वामीजी,
अरे केवे सुरता सुनो स्वामीजी,
आप बडा हरगंगी ए संतो भई,
मै बाबा बहुरंगी।।

ए साच झूठ मे अरे बीच मे खेलो,
अरे सिवरू राम सोहंगी,
अरे साच झूठ मे अरे बीच में खेलो,
अरे सिवरू राम सोहंगी,
अरे हेमनाथ केवे नही नाम हमारा,
अरे हेमनाथ केवे नही नाम हमारा,
अरे बसु देश में हंगी ओ संतो भई,
मै बाबा बहुरंगी।।

संतो भई मै बाबा बहुरंगी,
अरे नही किसी से न्यारा रेवे,
अरे किसी के संग,
ओ संतो भई मै बाबा बहुरंगी।।

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