श्री साई बाबा काकड आरति लिरिक्स | Shirdi Sai Baba Kakad Aarti in Hindi

साई बाबा की आरती “श्री साई बाबा काकड आरति लिरिक्स | Shirdi Sai Baba Kakad Aarti in Hindi” पंडित जी के द्वारा ये एक गजब का गीत है जिसके बोल उन्होंने अपने अमृतवाणी से ही गायन किया है , साथ ही अत्यंत प्यारी धुन और म्यूजिक दी गई है इस भजन पर जिसमे भक्ति ही रामी हुई है और आपको भक्ति की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करती है। । Sai Bhajan list | sai जी भजन लिरिक्स – Lyrics in Hindi , साई बाबा की क्या बात है | – हिंदी लिरिक्स | Bhajan Sangrah, .साईं बाबा साईं भजन lyrics Collections, साईं बाबा के भजन – Sai Baba ke Bhajan|. गुरुवार Special Sai Bhajanसाईं से मांगो साईं Sai Se Maango Sai … साईं राम साईं श्याम साईं भगवान | Sai Baba Bhajan · शिर्डी वाले साई बाबा आया , साईं बाबा भजन लिरिक्स – Sai Baba Hindi Bhajan Lyrics, Shirdi Sai Baba Hindi Bhajan Lyrics | टॉप 40 साईं बाबा …, साई बाबा अपने भक्तो के साथ आठो पहर विद्यमान रहते हैं , जिससे उनकी कृपा आप् पे बनी रहती है।

Shirdi Sai Baba Kakad Aarti in Hindi

श्री सच्चिदानन्द समर्ध सद्गुरु सायिनाध महराज् की जै.

१। जोडु नियाकर चरणि ठेविला माधा ।
परिसावी विनन्ती माझि पण्डरीनाधा ॥ १ ॥

असोनसो भाव आलो तूझिया ठाया ।
कृपा दृष्टि पाहे मजकडे सद्गुरुराया ॥ २ ॥

अखण्डीत सावे ऐसे वाटते पायी ।
साण्डूनी सङ्कोच ठाव थोडा सा देई ॥ ३ ॥

तुकाम्हणे देवा माझी वेडी वाकुडी ।
नामेभव पाश हाति आपुल्या तोडी ॥ ४ ॥

२। उठा पाण्डुरङ्गा प्रभात समयो पातला ।
वैष्णवाञ्च मेला गरुड पारी दाटला ॥ १ ॥

गरुडपारा पासुनि महा द्वारा पर्यन्त ।
सुरव राञ्ची मान्दी उभी जोडु नि हात ॥ २ ॥

शुकसनकादिक नारद तुम्बुर भक्ताञ्च्या कोटी ।
त्रिशूलढमरू घेउनि उभा गिरिजेचा पती ॥ ३ ॥

कलियुगीचा भक्तनामा उभा कीर्तनी ।
पाठीमागे उभीडोला लावुनिय जनी ॥ ४ ॥

३। उठा उठा श्रीसायिनाथ गुरु चरण कमलदावा ।
आदिव्याधि भवताप वारुनी तारा जडजीवा ॥ १ ॥

गेली तुम्हा सोडुनिया भव तमरजनी विलया ।
परिहि अज्ञानासी तुमची भुलवि योगमाया ॥ २ ॥

शक्तिन अम्हा यत्किञ्चित ही तिजला साराया ।
तुह्मीच तीते सारुनिदावा मुखजन ताराया ॥ ३ ॥

भो सायिनाथ महाराज भवतिमिरनाशक रवी ।
अज्ञानी अम्हीकिती तव वर्णावी धोरवी ॥ ४ ॥

तीवर्णिता भागले बहुवदनि शेषविधि कवी ।
सकृपहोवुनि महिमा तुमचा तुम्ही चवदवावा ॥ ५ ॥

आदिव्याधि भवताप वारुनी तारा जडजीवा ।
उठा उठा श्रीसायिनाथ गुरु चरण कमलदावा ।
आदिव्याधि भवताप वारुनी तारा जडजीवा ।

भक्तमनी सद्भावधरुनि जे तुम्ह अनुसरले ।
ध्यायास्तवते दर्शन तुमचे द्वारि उभेठेले ॥ ६ ॥

ध्यानस्था तुम्हास पाहुनि मन अमुचे धाले ।
परित्वद्वचनामृतप्राशाया ते आतूरुझाले ॥ ७ ॥

उघडूनि नेत्रकमाला दीनबन्धू रमाकान्ता ।
पाहि बा कृपादृष्टी बाल काजशी माता ॥ ८ ॥

रञ्जवी मधुरवाणी हरि ताप सायिनाथा ।
अम्हिच आपुले कार्यास्तव तुज कष्टवितो देवा ॥ ९ ॥

सहान करिशिल ऐकुनि ध्यावी भेट कृष्णदावा ॥

उठा उठा श्रीसायिनाथ गुरु चरण कमलदावा ।
आदिव्याधि भवताप वारुनी तारा जडजीवा ।

४। उठा पाण्डुरङ्गा आता दर्शन ध्य़ासकला ।
झाला अरुणोदय सरलीनिद्रेची वेला ॥ १ ॥

सन्त साधू मुनी अवघे झालेती गोला ।
सोडा शेजे सुख आता बहुद्या मुखकमला ॥ २ ॥

रङ्गमण्डपी महाद्वारी झालीसे दाटी ।
मन उतावीला रूप वहावया दृष्टी ॥ ३ ॥

रही रखुमाबा ई तुम्हा ये ऊ द्य़ादया ।
शेजे हालवुनी जागे करा देवराय ॥ ४ ॥

गरुड हनुमन्त उभे पाहती वाट ।
स्वर्गीचे सुरवर घे उनि आले बोभाट ॥ ५ ॥

झाले मुक्तद्वार लाभ झाला रोकडा ।
विष्णुदास नामा उभा घे उनि काकडा ॥ ६ ॥

५। घे उनि पञ्चारती करू बाबाञ्ची आरती
उठा उठाहो बान्धवा ओवालु हरमाधवा।
करूनिया स्थीरमन पाहु गंभीर हेध्यान
कृष्णनाधा दत्तसायी जडोचित्त तुझे पायी ॥

६। काकड आरति करीतो सायिनाथ देवा
चिन्मयरुपदा खवी घेवुनि बालक लघुसेवा
कामक्रोध मदमत्सर आतुनि काकडा केला
वैराग्याचे तूफ घालुनि मीतो बिजवीला
सायिनाथ गुरुभक्ति ज्वलने तोमी पेटविला
तद्वृत्ती जालुनी गुरूने प्रकाश पाडिला
द्वैततमा नासूनी मिलवी तत्स्वरूपिजीवा
चिन्मयरूपदाखवी घेवुनि बालक लघुसेव ॥

काकड आरति करीतो सायिनाथ देवा
चिन्मयरूपदाखवी घेवुनि बालक लघुसेवा

भूखेचर व्यापुनी आवघे हृत्कमली राहसी
तोचि दत्त देव शिरिडी राहुनि पावसी
राहुन येधे अन्यस्त्रहि तो भक्तास्तव धावसी
निरसुनिया सङ्कटा दासा अनुभव धावसी
नकलेत्वल्ली लाही कोण्या देवावा मानवा
चिन्मयरूपदाखवी घेवुनि बालक लघुसेव ॥

काकड आरति करीतो सायिनाथ देवा
चिन्मयरूपदाखवी घेवुनि बालक लघुसेवा

त्वद्दुशदुन्दुभीने सारे अम्बर हे कोन्दले
सगुणमूर्ति पाहण्य़ा आतुर जन शिरिडि आले
प्राशुनि त्वद्वचनामृत अमुचे देहभान हरफले
सोडुनिया दुरभिमान मानस त्वच्छरणि वाहिले
कृपाकरोनि सायिमावुले दास पदरि घ्यावा
चिन्मयरूपदाखवी घेवुनि बालक लघुसेव ॥

काकड आरति करीतो सायिनाथ देवा
चिन्मयरूपदाखवी घेवुनि बालक लघुसेवा

७। भक्तीचिया पोटी बोध काकड ज्योति ॥ १ ॥

पञ्चप्राण जीवे भावे ओवालू आरती ॥ २ ॥

ओवालू आरती माझा पण्डरीनाधा माझा सायिनाथ ॥ ३ ॥

दोन ही कर जोडूनी चरणी ठेविला माधा ॥ ४ ॥

काय महिमा वर्णू आता साङ्गणे किती ॥ ५ ॥

कोटि ब्रह्म हत्य मुख पाहता जाती ॥ ६ ॥

राही रखुमाभायी उभ्या दोघि दोबाही ।
मयूर पिञ्छ छामरे ढालिति सायीञ्चा ठायी ॥ ७ ॥

तुकाम्हणे दीवघे उनि उन्मनीत शोभा ।
वीठेवरी उभा दिसे लावण्य गाभा ॥ ८ ॥

८। उठा सादुसन्त सादा आपुलाले हित ॥

जा ईल जा ईल हा नरदेहा मगकैचा भगवन्त
उठोनिया पहटे बाबा उभा आसे विटे
चरण तयान्‍चे गोमटे अमृत दृष्टी अवलोका
उठा उठा होवेगेसी चला जा उयारा उलासी
जडतिल पातकान च्य़ाराशी काकड आरति देखिलिया
जागे करा रुक्मिणीवर देव आहे निजसुरान्त
वेगी लिम्बलोण करा दृष्टी हो ईल तयासी
द्वारी भाजन्त्री वाजती ढोलु ढमामे गर्जती
होतसे काकड आरती माझ्या सद्गुरु रायाची
सिंहनाद शङ्खभेरि आनन्द होतसे महाद्वारी
केसवराज विठेवरी नामचरण वन्दितो

९। सायिनाथ गुरु माझे आयी
मजलाठाव द्यावा पायी
दत्तराज गुरु माझे आयी
मजलाठाव द्यावा पायी
सायिनाथ गुरु माझे आयी
मजलाठाव द्यावा पायी

श्री सच्चिदानन्द सद्गुरु सायिनाथ महाराज की जै ।

१०। प्रभातसमयी नभा शुभ रविप्रभा पाकली
स्मरे गुरु सदा अशा समयित्या छले ना कली
ह्मणोनि कर जोडुनी करु अता गुरु प्रार्थना
समर्थगुरु सायिनाथ पुरवी मनोवासना ॥ १ ॥

तमा निरसि भानु हा गुरुहि नासि अज्ञनता
परन्तु गुरची करी नर विही कथी साम्यता
पुन्हा तिमिर जन्म घे गुरु कृपेनि अज्ञानना
समर्थगुरु सायिनाथ पुरवी मनोवासना ॥ २ ॥

रवि प्रगट हो उनि त्वरित घालवी आलसा
तसा गुरुहि सोडवी सकल दुष्कृती लालसा
हरोनी अभिमानहि जडवि त्वत्पदी भावना
समर्थगुरु सायिनाथ पुरवी मनोवासना ॥ ३ ॥

गुरूसि उपमा दिसे विधिहरीहराञ्चि वुणि
कुठोनिमग हे इती कवनीया वुगी पाहुणि
तुझीच उपमा तुला बरवि शोभते सज्जना
समर्थगुरु सायिनाथ पुरवी मनोवासना ॥ ४ ॥

समाधि वुतरोनिया गुरु चला मशीधीकडे
त्वदीय वचनोक्तिती मधुर वारिती साकडे
अजातरिपु सद्गुरो अखिल पातका भञ्जन
समर्थगुरु सायिनाथ पुरवी मनोवासना ॥ ५ ॥

अहा सुसमया सिया गुरु उठोनिया बैसले
विलोकुनि पदाश्रिता त्वदिय आपदे नासिले
असा सुहित कारिया जगति कोणिही अन्यना
समर्थगुरु सायिनाथ पुरवी मनोवासना ॥ ६ ॥

अशे बहुत शाहणा परिणज्या गुरूञ्चि कृपा
न तत्स्वहित त्याकले करित से रिकाम्या गपा
जरी गुरुपदा धरी सुधृड भक्तिनेतो मना
समर्थगुरु सायिनाथ पुरवी मनोवासना ॥ ७ ॥

गुरो विनतिमी करी हृदयमन्दिरि या बसा
समस्तजग हे गुरुस्वरुपची ठसो मानसा
घडो सतत सत्कृती मतिहि दे जगत्पावना
समर्थगुरु सायिनाथ पुरवी मनोवासना ॥ ८ ॥

११। प्रेमेया अष्टकाशी फडुनि गुरुवरा प्रार्धिती जे प्रभाति
त्याञ्चेचित्तासिदेतो अखिलहरुनिया भ्रान्ति मीनित्यशान्ति
ऐसेहे सायिनाथेकधुनि सुचविले जेवि याबालकाशी
तेवीत्या कृष्णपायी नमुनि सविनये अर्पितो अष्टकाशी

श्री सच्चिदानन्द सद्गुरु सायिनाथ महराज कि जै।

१२। सायि रहम नजर करना बच्चोङ्का पालन करना ॥ २ ॥

जाना तुमने जगत्पसारा सब हि झूठ जमाना ॥ २ ॥

सायि रहम नजर करना बच्चोङ्का पालन करना ॥ २ ॥

मै अन्धाहू बन्दा आपका मुझसे प्रभु दिखलाना ॥ २ ॥

सायि रहम नजर करना बच्चोङ्का पालन करना ॥ २ ॥

दासगणू कहे अब क्या बोलु थक गयि मेरी रसना ॥ २ ॥

सायि रहम नजर करना बच्चोङ्का पालन करना ॥ २ ॥

१३। रहम नजर करो अब मोरे सायी
तुम बिन नहि मुझे मा बाप भायी ॥ रहम नजर करो ॥

मै अन्धा हू बन्दा तुम्हारा ।
मै अन्धा हू बन्दा तुम्हारा ।
मै नाजानु मै नाजानु
मै नाजानु अल्ला इलाहि ॥ रहम नजर करो ॥

रहम नजर करो अब मोरे सायी
तुम बिन नहि मुझे मा बाप भायी ॥ रहम नजर करो ॥

खाली जमाना मैने गवाया ।
खाली जमाना मैने गवाया ।
साथी आकिर का साथी आकिर का
साथी आकिर का किया न कोयी ॥ रहम नजर करो ॥

रहम नजर करो अब मोरे सायी
तुम बिन नहि मुझे मा बाप भायी ॥ रहम नजर करो ॥

अप्ने मस्‍जिद का झाडू गनू है ।
अप्ने मस्‍जिद का झाडू गनू है ।
मालिक हमारे मालिक हमारे
मालिक हमारे तुम बाबा सायि ॥ रहम नजर करो ॥

रहम नजर करो अब मोरे सायी
तुम बिन नहि मुझे मा बाप भायी ॥ रहम नजर करो ॥

१४। तुज कायदे उसापल्यामी खायान्तरयो
तुज कायदे उ सद्गुरूमी खायान्तरी
मी दुबलि बटिक नाम्य़ाचि जाण श्रीहरि
मी दुबलि बटिक नाम्य़ाचि जाण श्रीहरि

उच्छिष्ट तुला देणे हि गोष्ट ना बरियो
उच्छिष्ट तुला देणे हि गोष्टना बरि
तू जगन्नाथ तु जदेऊ कशिरे भाकरि
तू जगन्नाथ तु जदेऊ कशिरे भाकरि

नको अन्त मदीय पाहुसख्या भगवन्ता श्रीकान्ता
मध्याह्न रात्रि उलटोनि गेलि हि आता अणु चित्ता
जाहो ईल तुझारे काकडा किरा उलान्तरियो
जाहो ईल तुझारे काकडा किरा उलान्तरी
अणतील भक्त नैवेद्यहि नानापरि
अणतील भक्त नैवेद्य हि नानापरि

तुज कायदे उसापल्यामी खायान्तरयो
तुज कायदे उ सद्गुरूमी खायान्तरी
मी दुबलि बटिक नाम्य़ाचि जाण श्रीहरि
मी दुबलि बटिक नाम्य़ाचि जाण श्रीहरि

१५। श्री सद्गुरु बाबा सायी ओ
श्री सद्गुरु बाबा सायी
तुजवाचुनि आश्रय नाही भूतली
तुजवाचुनि आश्रय नाही भूतली

मी पापि पतित धीमन्दा ओ
मी पापि पतित धीमन्दा
तारणेमला गुरुनाथा झढकरी
तारणेमला सायिनाथा झढकरी

तु शान्ति क्षमे चा मेरू ओ
तू शान्ति क्षमे चा नेरू
तुमि भवर्णवीचे तारू गुरुवरा
तुमि भवर्णवीचे तारू गुरुवरा

गुरुवरा मजसि पामरा अता उद्धरा
त्वरितलवलाहि त्वरितलवलाहि
मी बुडतो भवभयडोहि उद्दरा
मी बुडतो भवभयडोहि उद्दरा

श्री सद्गुरु बाबा सायी ओ
श्री सद्गुरु बाबा सायी
तुजवाचुनि आश्रय नाही भूतली
तुजवाचुनि आश्रय नाही भूतली

श्री सच्चिदानन्द सद्गुरु सायिनाथ महाराज की जै ।

राजाधिराज योगिराज परब्रह्म सायिनाथ महराज
श्री सच्चिदानन्द सद्गुरु सायिनाथ महराज की जै ।

Punjabi (Bhajan Lyrics in Punjabi | Punjabi Bhajan Lyrics)

ਜੈ ਸ਼੍ਰੀ ਸਚਿਦਾਨੰਦ ਸਮਰਧਾ ਸਾਧਗੁਰੂ ਸਾਈਨਾਥ ਮਹਾਰਾਜ।

  1. ਜੋਦੁ ਨਿਕਰ ਚਰਣੀ ਥੇਵਿਲਾ ਮਧਾ ॥
    ਪਰਿਸਵੀ ਵਿਨੰਤੀ ਮਾਝੀ ਪੰਡਰਿਣਾਧਾ। 1

ਅਸਨਸੋ ਭਵ ਆਲੋ ਤੁਝੀਆ ਥਾਇਆ ॥
ਹੇ ਸੱਚੇ ਆਤਮਕ ਮਾਲਕ! 2

ਮੈਨੂੰ ਅਟੁੱਟ ਪਰਛਾਵੇਂ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਹਿਸੂਸ ਹੋਏ.
ਸੰਦੁਨਿ ਸੰਕੋਚ ਥਾਵ ਥੋਡਾ ਸਾ ਦੇਇ ॥ 3

ਤੈਨੂੰ ਹੇ ਵਾਹਿਗੁਰੂ, ਮੇਰਾ ਪਾੜਾ ਵਕੁੜੀ ਹੈ।
ਨਾਮਭਾਵ ਪਾਸ਼ਾ ਹਤੀ ਆਪੁਲਿਆ ਤੋਡੀ ॥ 4

  1. 2. ਉੱਠ, ਪਾਂਡੁਰੰਗਾ, ਸਵੇਰੇ, ਸਮਾਂ ਪਤਲਾ ਹੈ।
    ਵੈਸ਼ਨਵੰਚ ਮੇਲਾ ਗਰੁੜ ਪਰੀ ਦਾਤਾਲਾ। 1

ਗਰੁੜਪਰਾ ਪਸੁਨਿ ਕੋ ਮਹਾ ਦੁਆਰ।
ਸੁਰਵ ਰਾਂਚੀ ਮੰਡੀ ਉਭੀ ਜੋੜੁ ਨੀ ਹਾਟ। 2

ਸ਼ੁਕਾਸਨਕਾਦਿਕ ਨਾਰਦ ਤੁਮ੍ਬਰ ਭਕ੍ਤਾਞ੍ਚਸ੍ਯ ਕਰੋਤਿ ॥
ਗਿਰਿਜਾ ਦਾ ਪਤੀ ਤ੍ਰਿਸ਼ੂਲ ਅਤੇ ਤਲਵਾਰ ਲੈ ਕੇ ਉੱਥੇ ਖੜ੍ਹਾ ਸੀ। 3

ਕਲਿਯੁਗੀਚ ਭਕ੍ਤਨਾਮਾ ਉਭਾ ਕੀਰਤਨਿ ॥
ਪਥਿਮਗੇ ਊਭੀਡੋਲਾ ਲਵਣੀਆ ਜਾਨੀ ॥ 4

  1. 3. ਊਥਾ ਊਥਾ ਸ੍ਰੀ ਸਾਈਂ ਨਾਥ ਗੁਰ ਚਰਨ ਕਮਲਦਾਵਾ।
    ਮੂਲ ਰੋਗ, ਭਵਤਪਾ, ਵਰੁਣੀ, ਤਾਰਾ ਅਤੇ ਜਦਾਜੀਵਾ। 1

ਗੇਲੀ ਤੁਮ੍ਹਾ ਸੁਦੂਨੀਆ ਭਵ ਤਾਮਰਜਨੀ ਵਿਲਾਇਆ ॥
ਆਪਣੀ ਅਗਿਆਨਤਾ ਤੋਂ ਬਚੋ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਯੋਗ-ਮਾਇਆ ਨੂੰ ਭੁੱਲ ਜਾਓ। 2

ਸ਼ਕ੍ਤਿਂ ਅਮ੍ਹਾ ਯਥਾਕਿਞ੍ਚਿਤ ਹਿ ਤਿਜਲਾ ਸਰਯਾ ॥
ਤੁਹਮੀਕਾ ਤੀਤੇ ਸਰੁਨਿਦਾਵਾ ਮੁਖਜਨਾ ਤਾਰਾਯਾ। 3

ਹੇ ਸਾਈਨਾਥ ਦੇ ਸੁਆਮੀ, ਹੇ ਮਹਾਨ ਪਾਤਸ਼ਾਹ, ਤੂੰ ਸੂਰਜ ਹੈਂ, ਮੌਤ ਦਾ ਨਾਸ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਹੈਂ।
ਮੈਂ ਬੇਸਮਝ ਹਾਂ ਅਤੇ ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਵਰਣਨ ਤੋਂ ਡਰਦਾ ਹਾਂ। 4

ਬਾਕੀ ਤਰੀਕਿਆਂ ਦਾ ਕਵੀ ਨੇ ਬਹੁ-ਪੱਖੀ ਹਿੱਸੇ ਦਾ ਤਿੱਖਾ ਵਰਣਨ ਕੀਤਾ ਹੈ।
ਸਕ੍ਰੁਪਾਹੋਵੁਨਿ ਮਹਿਮਾ ਤੁਮਚਾ ਤੁਮ੍ਹੀ ਚੈਵਦਵਾ ॥ 5

ਆਦਿਵ੍ਯਾਧਿ ਭਵਤਪਾ ਵਰੁਣੀ ਤਾਰਾ ਜਡਜੀਵਾ ।
ਊਥਾ ਊਥਾ ਸ੍ਰੀ ਸਾਈਂ ਨਾਥ ਗੁਰ ਚਰਨ ਕਮਲਦਾਵਾ।
ਆਦਿਵ੍ਯਾਧਿ ਭਵਤਪਾ ਵਰੁਣੀ ਤਾਰਾ ਜਡਜੀਵਾ ।

ਭਕ੍ਤਮਾਨੀ ਸਦਭਾਵਾਧਾਰੁਣੀ ਜੇ ਤੁਮ੍ਹ ਅਨੁਸਰਲੇ ॥
ਮੈਂ ਤੇਰੇ ਦਰ ਤੇ ਖਲੋ ਕੇ ਤੇਰੀ ਸਿਫ਼ਤਿ-ਸਾਲਾਹ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹਾਂ। 6

ਧ੍ਯਾਨਸ੍ਥਾ ਤੁਮ੍ਹਸ ਪਾਹੁਨਿ ਮਨ ਅਮੁਚੇ ਧਲੇ ॥
ਤੇਰੇ ਬੋਲਾਂ ਦੇ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਨਾਲ ਉਹ ਅਨੰਦ ਨਾਲ ਭਰ ਗਏ। 7

ਉਘਾਦੁਨੀ ਨੇਤ੍ਰਕਮਾਲਾ ਦੀਨਬਨ੍ਧੁ ਰਮਾਕਾਂਤਾ ॥
ਪਾਹਿ ਬਾ ਕ੍ਰਿਪਾਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਬਾਲਾ ਕਜਸ਼ੀ ਮਾਤਾ ॥ 8

ਰੰਜਵੀ, ਮਿੱਠੀ ਆਵਾਜ਼ ਵਾਲਾ, ਹਰੀ, ਤਪ, ਸੈਨਨਾਥ।
ਹੇ ਦੇਵਤੇ, ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਸ਼ਹਿਰ ਵਿੱਚ ਆਪਣੇ ਕਰਤੱਵਾਂ ਤੋਂ ਦੁਖੀ ਹੋ। 9

ਸਾਹਨ ਕਰਿਸ਼ਿਲ ਇਕੁਨੀ ਧਿਆਵੀ ਭੇਟ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨਾਦਵਾ।

ਊਥਾ ਊਥਾ ਸ੍ਰੀ ਸਾਈਂ ਨਾਥ ਗੁਰ ਚਰਨ ਕਮਲਦਾਵਾ।
ਆਦਿਵ੍ਯਾਧਿ ਭਵਤਪਾ ਵਰੁਣੀ ਤਾਰਾ ਜਡਜੀਵਾ ।

  1. 4. ਊਥਾ ਪਾਂਡੁਰੰਗਾ ਆਤਾ ਦਰਸ਼ਨ ਧਿਆਸਕਲਾ।
    ਸੂਰਜ ਚੜ੍ਹਿਆ ਅਤੇ ਉਸ ਦੇ ਸੌਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਹੋ ਗਿਆ। 1

ਸੰਤ ਸਾਧੂ ਮੁਨਿ ਅਵਗੇ ਝਲਤਿ ਗੋਲਾ।
ਸੋਦਾ ਪਤਿਤ ਸੁਖ ਅਬ ਬਹੁਦ੍ਯਾ ਮੁਖਕਮਾਲਾ ॥ 2

ਥੀਏਟਰ ਵਿੰਡੋਜ਼ ਨਾਲ ਮੋਟਾ ਹੈ.
ਮਨ ਉਤੇਜਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਰੂਪ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਦੁਆਰਾ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। 3

ਰਾਹੀ ਰਾਖੁਮਾਬਾ ਈ ਤੁਮ੍ਹਾ ਯੇ ਉ ਦਦਯਾ।
ਮੰਜੇ ਨੂੰ ਹਿਲਾਓ ਅਤੇ ਜਾਗੋ, ਮੇਰੇ ਜੀਜਾ. 4

ਗਰੁੜ ਹਨੂੰਮਾਨ ਖੜਾ ਰਾਹ ਦੇਖ ਰਿਹਾ ਹੈ।
ਉਹ ਸਵਰਗੀ ਸਰੀਰਾਂ ਵਿਚ ਆਏ. 5

ਝਲੇ ਖੁਲੇ ਬੂਹੇ ਲਾਭ ਝਲੇ ਰੋਕਦਾ।
ਵਿਸ਼ਨੂੰਦਾਸ ਨਾਂ ਦਾ ਇੱਕ ਕਾਂ ਸੀ। 6

  1. ਉਹ ਪੰਗਤੀਆਂ ਲੈ ਕੇ ਬਾਬੇ ਦੀ ਆਰਤੀ ਕਰ
    ਊਥਾ ਉਥਾਹੋ ਬੰਧਵਾ ਓਵਲੁ ਹਰਮਾਧਵਾ।
    ਕਰੁਨੀਆ ਸਥਿਰ ਮਨ ਦੇਖ ਗੰਭੀਰ ਹੇਧਿਆਣ
    ਕ੍ਰਿਸ਼ਨਾਧਾ, ਦੱਤਾਸਾਯ, ਮੰਦ-ਚਿੱਤ, ਤੁਸੀਂ ਮੈਨੂੰ ਲੱਭ ਲਿਆ ਹੈ।
  2. 6. ਕੱਕੜ ਆਰਤੀ ਕਰਿਤੋ ਸਾਈਨਾਥ ਦੇਵਾ
    ਚਿਨ੍ਮਯਰੂਪਦਾ ਖਾਵੀ ਘੇਵੁਨਿ ਬਾਲਕ ਲਘੁਸੇਵਾ ॥
    ਕਾਮ, ਕ੍ਰੋਧ, ਈਰਖਾ ਅਤੇ ਈਰਖਾ ਦੇ ਕਾਕੇ ਹਨ
    ਵੈਰਾਗ੍ਯੇ ਤੁਫ ਘਾਲੁਨਿ ਮੀਤੋ ਬਿਜਵਿਲਾ ॥
    ਸੈਨਾਥ ਗੁਰੁ ਭਗਤਿ ਜ੍ਵਲਨੇ ਤੋਮਿ ਪੇਟੀਲਾ ॥
    ਗੁਰੂ ਜੀ ਨੇ ਉਸ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਬਿਰਤੀ ਦੁਆਰਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਕੀਤਾ
    ਦ੍ਵਿਤੀਯਂ ਨਾਸੁਨਿ ਮਿਲ੍ਵੀ ਤਤ੍ਸ੍ਵਰੂਪਿਜੀਵਾ
    ਚਿਨ੍ਮਯਰੂਪਾਦਖਾਵੀ ਗੇਵੁਨਿ ਬਾਲਕ ਲਘੁਸੇਵਾ ॥

ਕੱਕੜ ਆਰਤੀ ਕਰਿਤੋ ਸਾਈਨਾਥ ਦੇਵਾ
ਚਿਨ੍ਮਯਾਰੁਪਦਾਖਵੀ ਗੇਵੁਨਿ ਬਾਲਕ ਲਘੁਸੇਵਾ ॥

ਭੁੱਖੇ ਭਟਕਣ ਵਾਲਾ ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਦਾ ਕੰਵਲ ਹੋਵੇਗਾ
ਤੋਚੀ ਦੈਤ ਦੇਵ ਸਿਰਿ ਰਹਨਿ ਪਾਵਸਿ ॥
ਰਾਹੁਂ ਯੇਧੇ ਅਨ੍ਯਸ੍ਤ੍ਰੀ ਕੋ ਭਕ੍ਤਸ੍ਤਵ ਧਵਾਸਿ ॥
ਨਿਰਸੁਨੀਆ ਸੰਕਾਤਾ ਦਾਸਾ ਅਨੁਭਵ ਧਵਾਸੀ
ਨਕ੍ਲੇਤਵਲ੍ਲੀ ਲਹਿ ਕਨ੍ਯਾ ਦੇਵਾ ਮਾਨਵਾ ॥
ਚਿਨ੍ਮਯਰੂਪਾਦਖਾਵੀ ਗੇਵੁਨਿ ਬਾਲਕ ਲਘੁਸੇਵਾ ॥

ਕੱਕੜ ਆਰਤੀ ਕਰਿਤੋ ਸਾਈਨਾਥ ਦੇਵਾ
ਚਿਨ੍ਮਯਾਰੁਪਦਾਖਵੀ ਗੇਵੁਨਿ ਬਾਲਕ ਲਘੁਸੇਵਾ ॥

ਤੇਰੇ ਢੋਲ ਨੇ ਸਾਰੇ ਅਕਾਸ਼ ਉਡਾ ਦਿੱਤੇ ਹਨ, ਹੇ ਕੋਂਡਲੇ
ਲੋਕ ਨੇਕੀ ਦੀ ਮੂਰਤੀ ਨੂੰ ਦੇਖਣ ਲਈ ਉਤਸੁਕ ਹੋ ਕੇ ਸ਼ਿਰੀਡੀ ਆਏ
ਪ੍ਰਸ਼ੁਨਿ ਤ੍ਵਦ੍ਵਾਚਨਮ੍ਰਿਤਾ ਅਮੁਚੇ ਦੇਹਭਾਨਾ ਹਰਫਲੇ ॥
ਸੋਦੁਨੀਆ ਦੁਰ੍ਭਿਮਾਨ ਮਾਨਸ ਤ੍ਵਚ੍ਛਰਾਣਿ ਵਹਿਲੇ ॥
ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸੇਵਕ ਨੂੰ ਸੈਮਾਵਲੇ ਵਿੱਚ ਲੈ ਜਾਓ
ਚਿਨ੍ਮਯਰੂਪਾਦਖਾਵੀ ਗੇਵੁਨਿ ਬਾਲਕ ਲਘੁਸੇਵਾ ॥

ਕੱਕੜ ਆਰਤੀ ਕਰਿਤੋ ਸਾਈਨਾਥ ਦੇਵਾ
ਚਿਨ੍ਮਯਾਰੁਪਦਾਖਵੀ ਗੇਵੁਨਿ ਬਾਲਕ ਲਘੁਸੇਵਾ ॥

  1. ਭਕ੍ਤਿਚਿਯਾ ਪੋਤੀ ਬੋਧ ਕਾਕੜਾ ਜੋਤਿ ॥ 1

ਪੰਚਪ੍ਰਣਾ ਜੀਵ ਭਾਵੇ ਓਵਲੁ ਆਰਤੀ ॥ 2

ਓਵਲੁ ਆਰਤੀ ਮਾਝਾ ਪੰਡਰੀਨਾਧਾ ਮਾਝਾ ਸੈਨਨਾਥ। 3

ਇਹ ਦੋਵੇਂ ਹੱਥ ਜੋੜ ਕੇ ਮਾਧੇ ਨੇ ਆਪਣੇ ਪੈਰ ਆਪਣੇ ਚਰਨਾਂ ਵਿੱਚ ਰੱਖ ਲਏ। 4

ਹੁਣ ਮੈਂ ਕਿਹੜੀ ਮਹਿਮਾ ਬਿਆਨ ਕਰਾਂ? 5

ਉਹ ਕ੍ਰੋੜਾਂ ਬ੍ਰਾਹਮਣਾਂ ਨੂੰ ਮਾਰ ਕੇ ਆਪਣਾ ਮੂੰਹ ਦੇਖਦੀ ਹੈ। 6

ਰਹੈ ਰਾਖੁਮਾਭੈ ਊਭਿਆ ਦੋਗਹਿ ਡੋਬਹਿ।
ਮੋਰ ਦੀ ਪੂਛ ਕੰਬਲ ਨਾਲ ਢਕੀ ਹੋਈ ਹੈ। 7

ਤੁਕਾਮਹਨੇ ਦਿਵਘੇ ਅੁਨਮਨਿਤ ਸੁੰਦਰਤਾ ॥
ਉਹ ਸੀਟ ਵਾਂਗ ਖੜ੍ਹੀ ਸੀ ਅਤੇ ਸੁੰਦਰ ਲੱਗ ਰਹੀ ਸੀ। 8

  1. 8. ਉਥਾ ਸਾਧੁਸੰਤਾ ਸਦਾ ਅਪੁਲੇ ਹਿਤ ॥

ਜਾ ਇਲ ਜਾ ਇਲ ਹੇ ਨਰਦੇਹ ਮਗਕੈ ਭਗਵੰਤ ॥
ਜਦੋਂ ਉਹ ਉੱਠਿਆ ਤਾਂ ਬਾਬਾ ਉੱਠ ਕੇ ਬੋਲਿਆ
ਚਰਨ ਤਯੰ ਚੇ ਗੋਮਤੇ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ॥
ਊਥਾ ਊਠਾ ਹੋਵੈਗੇਸੀ ਚਲੈ ਜਾ ਉਆਰਾ ਉਲਾਸੀ ॥
ਜਡਤਿਲ ਪਟਕਾੰ ਚਯਰਾਸ਼ੀ ਕੱਕੜ ਆਰਤੀ ਦੇਖਿਲਿਆ
ਜਾਗੋ, ਰੁਕਮਣੀ, ਭਗਵਾਨ ਤੁਹਾਡਾ ਆਪਣਾ ਦੈਂਤ ਹੈ
ਵੇਗੀ ਲਿੰਬਲੋਂ ਕਰਾ ਨਜ਼ਰ ਹੋਇ ਈਲ ਤਿਆਸੀ
ਦਰਵਾਜ਼ੇ ਦੀ ਘੰਟੀ ਵੱਜਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਢੋਲ ਵੱਜਦੇ ਹਨ
ਹੋਤਸੇ ਕੱਕੜ ਆਰਤੀ ਮੇਰੇ ਸਤਿਗੁਰੂ ਰਾਇਆ ਦੀ
ਮਹਾਨ ਦਰਵਾਜ਼ਾ ਸ਼ੇਰਾਂ ਅਤੇ ਸ਼ੰਖਾਂ ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਨਾਲ ਭਰਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ
ਕੇਸ਼ਵਰਾਜ ਵੀਤੇਵਾਰਿ ਨਾਮਚਰਣਾ ਵਨ੍ਦਿਤੋ ॥

  1. ਸਾਈਨਾਥ ਗੁਰੂ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਆਏ
    ਮਜਲਥਵ ਦਇਆਵ ਪਾਇ ॥
    ਦੱਤਰਾਜ ਗੁਰੂ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਆਇਆ
    ਮਜਲਥਵ ਦਇਆਵ ਪਾਇ ॥
    ਸਾਈਨਾਥ ਗੁਰੂ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਆਏ
    ਮਜਲਥਵ ਦਇਆਵ ਪਾਇ ॥

ਜੈ ਸ਼੍ਰੀ ਸਚਿਦਾਨੰਦ ਸਦਗੁਰੂ ਸਾਈਂ ਨਾਥ ਮਹਾਰਾਜ।

  1. ਸਵੇਰ ਦਾ ਅਸਮਾਨ ਸ਼ੁਭ ਸੂਰਜ ਦੀ ਰੌਸ਼ਨੀ ਨਾਲ ਪੱਕਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ
    ਗੁਰੂ ਨੂੰ ਸਦਾ ਯਾਦ ਰੱਖੋ, ਐਸੇ ਸਮੇ ਠੱਗੇ ਨਹੀਂ ਜਾਂਦੇ
    ਹਮਨੋ ਕਰਿ ਜੋਦੁਨਿ ਕਰੁ ਅਤਿ ਗੁਰੁ ਅਰਦਾਸਿ॥
    ਸਮਰਥਗੁਰੂ ਸੈਨਨਾਥ ਪੁਰਵੀ ਮਨੋਵਾਸਨਾ 1

ਤਮ ਨਿਰਾਸੀ ਭਾਨੁ ਹੇ ਗੁਰੁਹਿ ਨਾਸਿ ਅਗਨਤਾ॥
ਪਰ ਗੁਰਚੀ ਦੀ ਮਰਦ ਨਾਲ ਕੀ ਸਮਾਨਤਾ ਹੈ?
ਗੁਰਾਂ ਦੀ ਦਇਆ ਦੁਆਰਾ ਅਗਿਆਨਤਾ ਦਾ ਮੁੜ ਅੰਧਕਾਰ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
ਸਮਰਥਗੁਰੂ ਸੈਨਨਾਥ ਪੁਰਵੀ ਮਨੋਵਾਸਨਾ 2

ਸੂਰਜ ਉਹਨਾਂ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਬਿਤਾਇਆ ਆਲਸੀ ਜਾਪਦਾ ਹੈ
ਤਾਸਾ ਗੁਰਹਿ ਸੋਦਵੀ ਸਕਲ ਦੁਸ਼੍ਕ੍ਰਿਤੀ ਲਾਲਸਾ ॥
ਹਾਰੋਨਿ ਅਭਿਮਾਨਹਿ ਜਾਦਵੀ ਤ੍ਵਤ੍ਪਦੀ ਭਵਨਾ ॥
ਸਮਰਥਗੁਰੂ ਸੈਨਨਾਥ ਪੁਰਵੀ ਮਨੋਵਾਸਨਾ 3

ਗੁਰਸਿ ਉਪਮਾ ਦਿਸ ਵਿਧਿਹਰਿਹਰੰਚਿ ਵੁਨੀ ॥
ਕੁਥੋਨਿਮਗ ਉਹ ਇਤਿ ਕਵਣਿਆ ਵੁਗਿ ਪਾਹੂਨੀ
ਤੇਰੀ ਸਮਾਨਤਾ ਤੈਨੂੰ ਲਿਖਣ ਲਈ ਸੋਹਣੀ ਹੈ ਸੱਜਣ
ਸਮਰਥਗੁਰੂ ਸੈਨਨਾਥ ਪੁਰਵੀ ਮਨੋਵਾਸਨਾ 4

ਸਮਾਧੀ ਵੁਤਰੋਨੀਆ ਗੁਰੂ ਮਸਜਿਦ ਗਈ
ਤੇਰੇ ਬੋਲ ਹਵਾ ਦੇ ਮਿੱਠੇ ਹਨ
ਅਜਾਤਰਿਪੁ ਸਦਗੁਰੂ ਸਾਰੇ ਪਾਪਾਂ ਨੂੰ ਤੋੜਨ ਵਾਲਾ
ਸਮਰਥਗੁਰੂ ਸੈਨਨਾਥ ਪੁਰਵੀ ਮਨੋਵਾਸਨਾ 5

ਏਹੁ ਸੁਸਮਾਇਆ ਸਿਉ ਗੁਰੁ ਉਠੋਨੀਆ ਬੈਸਾਲੇ ॥
ਵਿਲੋਕਨਿ ਪਦਸ਼੍ਰੀਤਾ ਤ੍ਵਦੀਯਾ ਆਪਦੇ ਨਸੀਲੇ ॥
ਦੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ
ॐ ਸੁਹਿਤ ਕਰਿਅ ਜਗਤਿ ਕੋਣਿ ਅਨਾਨਾ
ਸਮਰਥਗੁਰੂ ਸੈਨਨਾਥ ਪੁਰਵੀ ਮਨੋਵਾਸਨਾ 6

ਐਸੇ ਬਹੁਤ ਸ਼ਾਹਾਨਾ ਪਰਿੰਜਿਆ ਗੁਰੁੰਚਿ ਕਿਰਪਾ ॥
ਨ ਕਿ ਸ੍ਵੈ-ਹਿਤ ਟਿਕਲੇ ਕਰਿਤ ਸੇ ਰਿਕਮ੍ਯ ਗਪਾ ॥
ਜਰਿ ਗੁਰੁਪਦਾ ਧਾਰੀ ਸੁਧਰੁ ਭਕ੍ਤਿਨੇਤੋ ਮਨਃ ॥
ਸਮਰਥਗੁਰੂ ਸੈਨਨਾਥ ਪੁਰਵੀ ਮਨੋਵਾਸਨਾ 7

ਗੁਰੁ ਵਿਨਤੀਮਿ ਕਰਿ ਹਿਰਦਯਾਮਨ੍ਦਿਰਿ ਯ ਬਾਸਾ ॥
ਸਾਰਾ ਸੰਸਾਰ ਗੁਰੂ ਦੇ ਸਰੂਪ ਦੀ ਛਾਪ ਹੈ
ਘਾਦੋ ਸਤਤ ਸਤਕ੍ਰਿਤੀ ਮਤਿਹਿ ਦੇ ਜਗਤਪਾਵਨਾ ॥
ਸਮਰਥਗੁਰੂ ਸੈਨਨਾਥ ਪੁਰਵੀ ਮਨੋਵਾਸਨਾ 8

  1. ਪ੍ਰੇਮਾ ਅਸ਼ਟਕਾਸ਼ੀ ਫਦੂਨਿ ਗੁਰੁਵਾਰਾ ਪ੍ਰਰਧਿਤਿ ਜੇ ਪ੍ਰਭਾਤਿ
    ਤ੍ਯਞ੍ਚਚਿਤਾਸਿਦ੍ਧੋ ਅਖਿਲਹਾਰੁਣਿਯਾ ਭ੍ਰਨ੍ਤਿ ਮਿਨਿਤ੍ਯਸ਼ਾਨ੍ਤਿ ॥
    ਐਸੇ ਸੈਨਤੇਕਧੁਨਿ ਸੁਚਿਲੇ ਜੇਵੀ ਯਬਲਕਾਸ਼ੀ
    ਤ੍ਵਤ੍ਯਾ ਕਸ਼੍ਣਪਾਯੀ ਨਮੁਨਿ ਨਿਮਰਤਾਮ੍ ਅਸ਼੍ਟਾਕਾਸ਼ੀ ॥

ਜੈ ਸ਼੍ਰੀ ਸਚਿਦਾਨੰਦ ਸਦਗੁਰੂ ਸਾਈਨਾਥ ਮਹਾਰਾਜ।

  1. ਸਾਈ ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰਨਾ ਬੱਚੋਂਕਾ ਪਾਲਨ ਕਰਨਾ। 2

ਤੁਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹੋ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਸੰਸਾਰ ਨੂੰ ਫੈਲਾਉਂਦੇ ਹੋ, ਇਹ ਸਭ ਝੂਠ ਹੈ। 2

ਸਾਈ ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰਨਾ ਬੱਚੋਂਕਾ ਪਾਲਨ ਕਰਨਾ। 2

ਮੈਂ ਤੇਰਾ ਅੰਨ੍ਹਾ ਸੇਵਕ ਹਾਂ, ਪ੍ਰਭੂ, ਮੈਨੂੰ ਵਿਖਾ। 2

ਸਾਈ ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰਨਾ ਬੱਚੋਂਕਾ ਪਾਲਨ ਕਰਨਾ। 2

ਦਾਸਗਨੁ ਕਹੇ ਅਬ ਕਿਆ ਬੋਲੁ ਥਕ ਗਾਈ ਮੇਰੀ ਰਸਨਾ ॥ 2

ਸਾਈ ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰਨਾ ਬੱਚੋਂਕਾ ਪਾਲਨ ਕਰਨਾ। 2

  1. ਹੁਣ ਮੇਰੇ ਉੱਤੇ ਮਿਹਰ ਕਰ, ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ
    ਤੁਮ ਬਿਨ ਨਾ ਮੁਝੇ ਮਾਂ ਬਾਪ ਭਾਏ ॥ ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰੇ।

ਮੈਂ ਅੰਨ੍ਹਾ ਹਾਂ, ਤੇਰਾ ਸੇਵਕ।
ਮੈਂ ਅੰਨ੍ਹਾ ਹਾਂ, ਤੇਰਾ ਦਾਸ।
ਮੈਨੂੰ ਨਹੀਂ ਪਤਾ ਮੈਂ ਨਹੀਂ ਜਾਣਦਾ
ਮੈਂ ਅੱਲ੍ਹਾ ਇਲਾਹੀ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਜਾਣਦਾ। ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰੇ।

ਹੁਣ ਮੇਰੇ ਉੱਤੇ ਮਿਹਰ ਕਰ, ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ
ਤੁਮ ਬਿਨ ਨਾ ਮੁਝੇ ਮਾਂ ਬਾਪ ਭਾਏ ॥ ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰੇ।

ਮੈਂ ਆਪਣਾ ਖਾਲੀ ਸਮਾਂ ਗੁਆ ਦਿੱਤਾ।
ਮੈਂ ਆਪਣਾ ਖਾਲੀ ਸਮਾਂ ਗੁਆ ਦਿੱਤਾ।
ਅਕੀਰ ਦਾ ਸਾਥੀ ਅਕੀਰ ਦਾ ਸਾਥੀ
ਸਾਥੀ ਆਕਿਰ ਕਾ ਕਿਆ ਨਾ ਕੋਇ ॥ ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰੇ।

ਹੁਣ ਮੇਰੇ ਉੱਤੇ ਮਿਹਰ ਕਰ, ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ
ਤੁਮ ਬਿਨ ਨਾ ਮੁਝੇ ਮਾਂ ਬਾਪ ਭਾਏ ॥ ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰੇ।

ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਮਸਜਿਦ ਨੂੰ ਝਾੜਿਆ ਹੈ।
ਮੈਂ ਆਪਣੀ ਮਸਜਿਦ ਨੂੰ ਝਾੜਿਆ ਹੈ।
ਸਾਡਾ ਮਾਲਕ ਸਾਡਾ ਮਾਲਕ ਹੈ
ਮਲਿਕ ਹਮਾਰੇ ਤੁਮ ਬਾਬਾ ਸਾਈਂ ॥ ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰੇ।

ਹੁਣ ਮੇਰੇ ਉੱਤੇ ਮਿਹਰ ਕਰ, ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ
ਤੁਮ ਬਿਨ ਨਾ ਮੁਝੇ ਮਾਂ ਬਾਪ ਭਾਏ ॥ ਰਹਿਮ ਨਜ਼ਰ ਕਰੇ।

  1. ਤੁਹਾਡੇ ਕਾਨੂੰਨ ਭੋਜਨ ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ
    ਤੁਜ ਕਹਦੇ ਉ ਸਦਗੁਰੁਮਿ ਖਯੰਤਰੀ ॥
    ਮੈਂ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹਾਂ ਅਤੇ ਮੈਂ ਸ੍ਰੀਹਰੀ ਨੂੰ ਜਾਣਦਾ ਹਾਂ
    ਮੈਂ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹਾਂ ਅਤੇ ਮੈਂ ਸ੍ਰੀਹਰੀ ਨੂੰ ਜਾਣਦਾ ਹਾਂ

ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਚੇ ਹੋਏ ਨੂੰ ਦੇਣਾ ਚੰਗਾ ਨਹੀਂ ਹੈ
ਬਚਿਆ ਹੋਇਆ ਸੰਤੁਲਨ ਦੇਣ ਨਾਲੋਂ ਗੱਲ ਕਰਨੀ ਬਿਹਤਰ ਹੈ
ਤੂੰ ਜਗਨਨਾਥ ਹੈਂ, ਤੂੰ ਹੀ ਜਦੇਉ ਕਸ਼ੀਰ ਭਾਕਾਰੀ
ਤੂੰ ਜਗਨਨਾਥ ਹੈਂ, ਤੂੰ ਹੀ ਜਦੇਉ ਕਸ਼ੀਰ ਭਾਕਾਰੀ

ਮੇਰੇ ਮਹਿਮਾਨ, ਭਗਵਾਨ ਸ਼੍ਰੀਕਾਂਤਾ ਨੂੰ ਖਤਮ ਨਾ ਕਰੋ
ਅੱਧੀ ਰਾਤ ਉਲਟ ਗਈ ਤੇ ਹੁਣ ਐਟਮ ਮਨ
ਜਾਓ ਆਪਣੇ ਕੋਇਲ ਕੀੜੇ ulantario eel
ਜਾਓ ਆਪਣੇ ਕੋਇਲ ਕੀੜੇ ulantari eel
ਅਨਤਿਲ ਭਕ੍ਤਾ ਨੈਵੇਦ੍ਯਾਹਿ ਨਾਨਾਪਰੀ ॥
ਅੰਤਿ ਭਗਤਿ ਭੇਟਾ ਅਨੇਕ ਹੈ

ਤੁਹਾਡੇ ਕਾਨੂੰਨ ਭੋਜਨ ਲੜੀ ਵਿੱਚ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ
ਤੁਜ ਕਹਦੇ ਉ ਸਦਗੁਰੁਮਿ ਖਯੰਤਰੀ ॥
ਮੈਂ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹਾਂ ਅਤੇ ਮੈਂ ਸ੍ਰੀਹਰੀ ਨੂੰ ਜਾਣਦਾ ਹਾਂ
ਮੈਂ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹਾਂ ਅਤੇ ਮੈਂ ਸ੍ਰੀਹਰੀ ਨੂੰ ਜਾਣਦਾ ਹਾਂ

  1. ਸ਼੍ਰੀ ਸਦਗੁਰੂ ਬਾਬਾ ਸਾਈਂ ਓ
    ਸ਼੍ਰੀ ਸਦਗੁਰੂ ਬਾਬਾ ਸਾਈਂ
    ਤੁਜਵਾਚੁਨਿ ਆਸਰੇ ਨ ਭੂਤਾਲੀ ॥
    ਤੁਜਵਾਚੁਨਿ ਆਸਰੇ ਨ ਭੂਤਾਲੀ ॥

ਮੈਂ ਪਾਪੀ ਪਤਿਤ ਸਿਆਣਾ ਆਦਮੀ ਹਾਂ
ਮੈਂ ਪਾਪੀ ਪਤਿਤ ਸਿਆਣਾ ਆਦਮੀ ਹਾਂ
ਤਰਨੇਮਾਲਾ ਗੁਰੂਨਾਥ ਝਡਕਾਰੀ
ਤਰਨੇਮਾਲਾ ਸੈਨਨਾਥ ਝਡਕਾਰੀ

ਹੇ ਮੇਰੁ, ਤੂੰ ਸ਼ਾਂਤਮਈ ਅਤੇ ਮਾਫ਼ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਹੈਂ
ਤੁਸੀਂ ਸ਼ਾਂਤੀਪੂਰਨ ਅਤੇ ਮਾਫ਼ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਹੋ
ਤੂੰ ਭਾਵਰਨਵੀ, ਗੁਰੂਵਾਰਾ ਦਾ ਤਾਰਾ ਹੈਂ
ਤੂੰ ਭਾਵਰਨਵੀ, ਗੁਰੂਵਾਰਾ ਦਾ ਤਾਰਾ ਹੈਂ

ਗੁਰੁ ਮਾਜਸਿ ਪਮਾਰਾ ਅਤਿ ਉਧਾਰਾ ॥
ਤਵਾਰੀਤਲਾਵਲਾਹੀ
ਮੈਂ ਮੌਤ ਦੇ ਡਰ ਅੰਦਰ ਡੁੱਬ ਰਿਹਾ ਹਾਂ
ਮੈਂ ਮੌਤ ਦੇ ਡਰ ਅੰਦਰ ਡੁੱਬ ਰਿਹਾ ਹਾਂ

ਸ੍ਰੀ ਸਦਗੁਰੂ ਬਾਬਾ ਸਾਈਂ ਓ
ਸ਼੍ਰੀ ਸਦਗੁਰੂ ਬਾਬਾ ਸਾਈਂ
ਤੁਜਵਾਚੁਨਿ ਆਸਰੇ ਨ ਭੂਤਾਲੀ ॥
ਤੁਜਵਾਚੁਨਿ ਆਸਰੇ ਨ ਭੂਤਾਲੀ ॥

ਜੈ ਸ਼੍ਰੀ ਸਚਿਦਾਨੰਦ ਸਦਗੁਰੂ ਸਾਈਂ ਨਾਥ ਮਹਾਰਾਜ।

ਰਾਜਾਧਿਰਾਜ ਯੋਗੀਰਾਜ ਪਾਰਬ੍ਰਹਮ ਸਾਈਨਾਥ ਮਹਾਰਾਜ
ਜੈ ਸ਼੍ਰੀ ਸਚਿਦਾਨੰਦ ਸਦਗੁਰੂ ਸਾਈਨਾਥ ਮਹਾਰਾਜ।

English (Bhajan Lyrics in English)

jay shree sachchidaanand samardha sadguru saeenaath mahaaraaj.

  1. jodee niyaakar charnee thevila maadha.
    perisavee vinantee maanjhee parnanaadha 1

asonaso bhav aalo tujhiya thaaya.
he sachche aadhyaatmik guru, krpaya apanee dayaalu drshti sarp par rakhen. 2

mainne atoot chhaayaon ko is tarah mahasoos kiya.
sandoonee sankoch thaav thoda sa deee 3

aapake lie, he bhagavaan, meree keel vaakudee hai.
naamabhaav paasha hatee aapuly todee 4

  1. 2. utho, paanduranga, subah, samay patala hai.
    vaishnavanch mela garud paree datala 1

garudapaara pasunee se mahaan dvaar tak.
surav raanchee mandee ubhee jodee nee haat 2

shukasanakaadik naarad tumboor bhaktaanchy koti.
girija ka pati trishool aur talavaar lie vaheen khada tha. 3

kaliyugeecha bhaktanaama ubh keertanee.
pathimej ubidola laavuniya jaanee 4

  1. 3. 3. utha utha shree saee naath guru charan kamaladaav.
    mool rog, bhavatapa, varun, taara aur jadajeeva . 1

gelee tumhen soduniya bhav tamarajaanee vila.
apanee agyaanata se bacho aur apanee yog-maaya ko bhool jao . 2

shaktiin amah yathakinchit hee tijala saraay.
tuhmika tete sarunidaava mukhajan taaray 3

he saeenaath ke bhagavaan, he mahaan raaja, tum soory ho, mrtyu ka naash karane vaale.
main agyaanee hoon, aur main aapake vivaran se darata hoon. 4

kavi ne shesh vidhiyon ke bahuaayaamee bhaag ka teevr varnan kiya hai.
sakrpaahovuni mahima tumcha tumi chaavadva. 5

aadivyaadhi bhavatapa varunee taara jadajeeva.
utha utha shree saee naath guru charan kamaladaav.
aadivyaadhi bhavatapa varunee taara jadajeeva.

bhaktamani sadabhaavadhaarunee je tum anusaraale.
main aapake dvaar par khada hoon, dhyaan kar raha hoon aur aapakee stuti kar raha hoon. 6

dhyaanasth tumahas paahunee man achchhe dhaale.
aapake vachanon ke amrt se ve harshit ho uthe. 7

ugaadunee netrakamala deenabandhu ramaakaant.
paahi ba krpaadrashti baala kaajashee maata 8

ranjavee, madhur vaanee, hari, tap, saeenaath.
he devataon, aap is shahar mein apane kartavyon se peedit hain. 9

sahan karishil aikuni dhiyavee bhet krshnadaav

utha utha shree saee naath guru charan kamaladaav.
aadivyaadhi bhavatapa varunee taara jadajeeva.

  1. 4. utha paanduranga aata darshan dhyaanashaala.
    sooraj ug aaya aur usake sone ka samay ho gaya. 1

sant saadhu muni avaghe jhaletee gola.
soda ab khushee se jhooth bol raha hai bahudya mukhakamala. 2

thietar khidakiyon se ghana hai.
man uttejit hota hai aur drshti se roop dhaaran karata hai. 3

raahee rakhoomaaba e tumha ye u dayaadaya.
bistar hilao aur jaago, mere jeejaajee. 4

garud hanumaan khade hokar raasta dekh rahe hain.
ve svargeey nikaayon mein aae. 5

jhaale khule daravaaje se jhale rokaada ko phaayada hota hai.
vishnudaas naam ka ek kaua tha. 6

  1. vo pancharatee len aur karen baaba kee aaratee
    utha uthaaho baandhav ovaalu haramaadhav.
    karuniya sthir man gambheer hedhyaan dekho
    krshnadha, dattaasaee, sust dimaag, tumane mujhe paaya hai .
  2. 6. kaakad aaratee karito saeenaath dev
    chinmayaarupada khavee ghevunee baalak laghuseva
    kaam, krodh, eershya aur eershya kekade hain
    vairaagyache tuph galunee mito bijavila
    saeenaath gurubhakti jvaalaane tomee petavila
    guru ne apane drshtikon se unhen prabuddh kiya
    dvaitavaadee naasunee milvee tatsvaroopajeev
    chinmayarupadakhavi ghevunee baalak laghuseva.

kaakad aaratee karito saeenaath dev
chinmayaarupadakhavee ghevunee baalak laghuseva

bhookha pathik mere hrday ka kamal hoga
tochee datta dev shiridee raahunee pavaasee
raahu yedhe anyaastree se bhaktastav dhaavasee
nirasuniya sankat daas anubhav dhavasee
nakletavallee lahee konya devava maanav:
chinmayarupadakhavi ghevunee baalak laghuseva.

kaakad aaratee karito saeenaath dev
chinmayaarupadakhavee ghevunee baalak laghuseva

tere dhol ne saara aakaash uda diya hai, he kondaale
puny moorti ke darshan ko aatur shiradee pahunche log
prashuni tvadvachanaamrt amuche dehabhaana haraphale
soduniya durbheemaan maanas tvachachaaranee vaahile
krpaya naukar ko saimaavule le jaen
chinmayarupadakhavi ghevunee baalak laghuseva.

kaakad aaratee karito saeenaath dev
chinmayaarupadakhavee ghevunee baalak laghuseva

  1. bhaktichiya potee bodh kaakada jyoti 1

panchapraan jeev bhaave ovalu aaratee. 2

ovaalu aaratee maajha pandareenaadha maajha saeenaath 3

in donon haathon ko milaakar maadha ne unake charanon mein pair rakh die. 4

ab main kis mahima ka varnan karoon? 5

vah laakhon braahmanon ko maaratee hai aur apana chehara dekhatee hai. 6

raahee rakhoomaabhaee ubhya doghee dobaahee.
mor kee poonchh kambal se dhakee hotee hai. 7

tukamhaane divghe uni unmaanit saundary.
vah ek seet kee tarah khadee thee aur sundar lag rahee thee. 8

  1. 8. utha saadhusant sada apulaale hit

ja il ja il ha naradeha magakaicha bhagavantee
jab ve uthe to baaba uth khade hue aur bole:
charan taayan che gomet amrt darshan
utha utha hovegesee chala ja uyara ulaasee
jadatil pataakaan chirashee kaakad aaratee dekhaliya
jaago, rukminee, bhagavaan tumhaara hee daanav hai
vegee limbalon kara drshti ho eel tayasee
daravaaje kee ghantee bajatee hai aur dhol bajata hai
mere sadguru raay kee hoteese kaakad aaratee
mahaan dvaar sinh aur shankh kee aavaaj se bhar jaata hai
keshavaraaj vithevaree naamacharan vandito

  1. saeenaath guru mere paas aae
    majalaathav dayaav paee
    dattaaraaj guru mere paas aae
    majalaathav dayaav paee
    saeenaath guru mere paas aae
    majalaathav dayaav paee

jay shree sachchidaanand sadguru saee naath mahaaraaj.

  1. subah ka aasamaan shubh dhoop se pak gaya hai
    guru ko sada yaad rakho, aisa samay dhokha nahin deta
    hamanonee kar jodee karu ata guru praarthana
    samarthaguru saeenaath pooravee manovaasana 1

tam nirasee bhaanu ha guruhee nasee agnanaat:
lekin gurachee kee ek aadamee se kya samaanata hai?
guru kee krpa se phir se andhakaar ka janm hota hai, agyaan
samarthaguru saeenaath pooravee manovaasana 2

sooraj jaldee vyateet karane vaale aalasee prateet hote hain
tasa guruhee sodavee sakal dushkrtee laalasa
haronee abhimanahi jaadavee tavatapadee bhavan
samarthaguru saeenaath pooravee manovaasana 3

gurusee upama dise vidhihaareeharanchee vuni
kuthonimag he iti kavaniya vugee pahunee
aapakee samaanata aapako likhane ke lie sundar hai, sajjano
samarthaguru saeenaath pooravee manovaasana 4

samaadhi vutroniya guru masjid gae
aapake shabd hava ko meethe hain
ajaataripu sadguru sabhee paapon ko todane vaale
samarthaguru saeenaath pooravee manovaasana 5

aha susamaya siya guru uthoniya baisaale
vilokuni padashrita tavadiya aapade naseele
jaisa
ek suhit kariya jagatee konihee anyaana
samarthaguru saeenaath pooravee manovaasana 6

aashe bahut shahana parinjay gurunchee krpa
aisa nahin hai ki svaarth tyaklai karit sai richamy gp
jaree gurupaad dhaaree shuddhud bhaktineto man
samarthaguru saeenaath pooravee manovaasana 7

guru vintimee kaaree hrdayamandiree ya bas
guru ke roop kee chhaap hai saara sansaar
ghato satt satkrti matihi de jagatapaavan
samarthaguru saeenaath pooravee manovaasana 8

1 1. premey ashtakashee phaadunee guruvar pradhiti je prabhaatee
tyaanchechittasideto akhilaaruniya bhraanti minityashaanti
aisehe saeenthekadhoonee aisevile jevee yabaalakaashee
tevity krshnapayee namuni ne namrataapoorvak ashtakashee arpit kee

jay shree sachchidaanand sadguru saeenaath mahaaraaj.

  1. saeen raham nazar karn bachachonka paalan karn 2

aap jaanate hain ki aapane duniya ko phailaaya hai, yah sab jhooth hai. 2

saeen raham nazar karn bachachonka paalan karn 2

main tera andha daas hoon, he prabhu, mujhe dikha. 2

saeen raham nazar karn bachachonka paalan karn 2

dasaganu kahe ab kya boloo thak gaee meree rasana 2

saeen raham nazar karn bachachonka paalan karn 2

  1. ab mujh par daya karo, mere priy
    tum bin nahin mujhe maan baap bhaee raham nazar karo.

main andha hoon, aapaka sevak.
main andha hoon, aapaka sevak.
mujhe nahin pata mujhe nahin pata
main allaah ilaahee ko nahin jaanata. raham nazar karo.

ab mujh par daya karo, mere priy
tum bin nahin mujhe maan baap bhaee raham nazar karo.

mainne apana khaalee samay kho diya.
mainne apana khaalee samay kho diya.
akeer ke saathee akeero ka saathee
saathee aakir ka kiya na koee raham nazar karo.

ab mujh par daya karo, mere priy
tum bin nahin mujhe maan baap bhaee raham nazar karo.

mainne apanee masjid kee saphaee kar dee hai.
mainne apanee masjid kee saphaee kar dee hai.
hamaara maalik hamaara maalik hai
malik hamaare tum baaba saeen raham nazar karo.

ab mujh par daya karo, mere priy
tum bin nahin mujhe maan baap bhaee raham nazar karo.

  1. khaady shrrnkhala mein aapake niyamon ka upayog kiya jaata hai
    tujh kede u sadgurumee khayantari
    main kamajor hoon aur main shreehari ko jaanata hoon
    main kamajor hoon aur main shreehari ko jaanata hoon

aapako bacha hua dena achchha nahin hai
bacha hua bailens dene se baat karana achchha hai
aap jagannaath hain, aap jadoo kaashaayar bhaakaree hain
aap jagannaath hain, aap jadoo kaashaayar bhaakaree hain

mere mehamaanon ko khatm mat karo, bhagavaan shreekaant
aadhee raat ulatee ho gaee aur ab paramaanu man
jao apane koyal keet ulantariyo
jao apane koyal keet ulantari
anaatil bhakt naivedyahee naanaaparee
entee bhakt prasaad vividh hain

khaady shrrnkhala mein aapake niyamon ka upayog kiya jaata hai
tujh kede u sadgurumee khayantari
main kamajor hoon aur main shreehari ko jaanata hoon
main kamajor hoon aur main shreehari ko jaanata hoon

  1. shree sadguru baaba saeen o
    shree sadguru baaba saeen
    tujvaachuni aasare nahin bhutaali
    tujvaachuni aasare nahin bhutaali

main ek paapee patit buddhimaan vyakti hoon
main ek paapee patit buddhimaan vyakti hoon
taranemaala gurunaath jhadakaree
taranemaala saeenaath jhadakaree

aap shaant aur kshamaasheel hain, he meru
aap shaant aur kshamaasheel hain
aap bhaavarnavee ke sitaare hain, guruvar
aap bhaavarnavee ke sitaare hain, guruvar

guruvara majasee paramaara ata uddhar:
tvaritalavalhee tvaritalavalahee
main maut ke dar mein doob raha hoon
main maut ke dar mein doob raha hoon

shree sadguru baaba saeen o
shree sadguru baaba saeen
tujvaachuni aasare nahin bhutaali
tujvaachuni aasare nahin bhutaali

jay shree sachchidaanand sadguru saee naath mahaaraaj.

raajaadhiraaj yogeeraaj parabrahm saeenaath mahaaraaj
jay shree sachchidaanand sadguru saeenaath mahaaraaj.

Shirdi Sai Baba Kakad Aarti in Hindi

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