संगी सखि हे बहिना मैथिली लोकगीत

संगी सखि हे बहिना मैथिली लोकगीत

संगी सखि हे बहिना
हम आइ देखल एक सपना
हे हम आइ देखल एक सपना
हमरो साजन बूढ़ बर छथि
मुखमे दांत एको नहि
पाकल-पाकल केश बूढ़ के
देखबामे केहनो नहि
नहि छनि बूढ़के घर-घरारी
नहि छनि केओ अपना
जे किछु बांचल छलनि बूढ़ के
ब्याहमे पड़लनि भरना
जखन बुढ़ा कोबर घर चलला
थर-थर कांपय बदनमा
जखनसँ देखल इहो सपन हम
झर-झार बहय नयनमा
संगी सखी हे बहिना
हे हम आइ देखल एक सपना

Leave a Reply