आखरी समय में हम करीब हो न हो,
मिट्टी खाटू धाम की नसीब हो न हो।।

जब तक तन में ये सांस रहेगी,
थोड़ी सी ये मिटटी मेरे पास रहेगी,
क्या पता ये धाम नज़दीक हो न हो,
मिट्टी खाटू धाम की नसीब हो न हो।।

तेरे धाम की ये मिटटी बड़ी ही महान,
इसके तो कण कण में है मेरा श्याम,
इससे अच्छा मेरा ये नसीब हो न हो,
मिट्टी खाटू धाम की नसीब हो न हो।।

लाखों लाखों भक्तों के पाँव पड़े हैं,
बरसों से इसमें मेरे श्याम खड़े है,
अगले जनम में ये गरीब हो ना हो,
मिट्टी खाटू धाम की नसीब हो न हो।।

‘बनवारी’ मेरा ये नसीब खुल जाए,
तेरी मिटटी में ये मेरी मिटटी मिल जाए,
नाम मेरा भक्तों में शरीक हो ना हो,
मिट्टी खाटू धाम की नसीब हो न हो।।

आखरी समय में हम करीब हो न हो,
मिट्टी खाटू धाम की नसीब हो न हो।।

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कृष्ण भजन आखरी समय में हम करीब हो न हो भजन लिरिक्स

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