आरती अवध बिहारी की,
दयामयी जनकदुलारी की।।

सिंहासन सोहे युगल सरकार,
परस्पर हँसी हेरत हर बार,
मधुर कछु बोल लेत मन मोल,
ललित छवि प्रीतम प्यारी की,
दयामयी जनकदुलारी की,
आरतीं अवध बिहारीं की,
दयामयी जनकदुलारी की।।

अलोकत पाय अंजनीलाल,
निरखि पग पंकज होत निहाल,
कहत रघुराई धन्य सेवकाई,
पवनसुत गिरिवर धारी की,
दयामयी जनकदुलारी की,
आरतीं अवध बिहारीं की,
दयामयी जनकदुलारी की।।

भरतजू ठाड़े भाव विभोर,
लखन रिपु दमन लाल करजोर,
लखे मुख चंद लेत आनंद,
धन्य शोभा धनुधारी की,
दयामयी जनकदुलारी की,
आरतीं अवध बिहारीं की,
दयामयी जनकदुलारी की।।

आरती जो कोई जन गावे,
प्रभु पद प्रेम अवश्य पावे,
शरण राजेश दवे अवधेस,
बोलिए जय जय भयहारी की,
दयामयी जनकदुलारी की,
आरतीं अवध बिहारीं की,
दयामयी जनकदुलारी की।।

आरती अवध बिहारी की,
दयामयी जनकदुलारी की।।

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