काया रूपी चुनड़ी में,
रंग चढ़ ग्यो।

दोहा – मुरली वाले सांवरा,
तेरी मुरली नेक बजाई,
इण मुरली में मारो मन बसो,
कान्हा एकर और बजाए।

काया रूपी चुनड़ी मे,
रंग चढ़ ग्यो,
मुरली वालों सांवरो,
मारे मन बसग्यो।।

काया रूपी चुनड़ी में,
खाटू में रंगाऊली,
ओढ के चुनड़ी मे,
श्याम आगे जाऊंला,
ओर रंग ओढू कोनी,
हियो नटग्यो,
मुरली वालों सांवरो,
मारे मन बसग्यो।।

बाजरे की रोटी साग,
फलया को बंनाऊला,
बैठ के आंगणिये मेरे,
श्याम ने जीमाऊला,
धाबलियो ओले,
खिचड़ो चट करग्यो,
मुरली वालों सांवरो,
मारे मन बसग्यो।।

चांदणी बारस की,
जोत जगाऊंली,
बैठ के आगणिये,
मेरे श्याम ने रिझाऊली,
घीरत बाती की,
ज्योत करलो,
मुरली वालों सांवरो,
मारे मन बसग्यो।।

केशरियो निशान लेके,
खाटू मे आऊला,
तन मन धन मै,
सब ही लुटाऊला,
साचो तो सेठ धणी,
श्याम मिलग्यो,
मुरली वालों सांवरो,
मारे मन बसग्यो।।

रामदास जी बाबा,
आपरा पुजारी है,
बालाजी री भग्त मण्डली,
गावे महिमा थारी है,
श्यामजी रो नाम,
दिन रात रटल्यो,
मुरली वालों सांवरो,
मारे मन बसग्यो।।

काया रूपी चुनड़ी मे,
रंग चढ़ ग्यो,
मुरली वालों सांवरो,
मारे मन बसग्यो।।

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राजस्थानी भजन काया रूपी चुनड़ी में रंग चढ़ ग्यो मुरली वालों सांवरो

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