खाटू की गलियां रहती सदा गुलज़ार है,
इनमे लीले चढ़ घूमे लखदातार है,
इन गलियों में बसता एक नया संसार है,
हाँ संसार है, हाँ संसार है,
खाटू की गलियाँ रहती सदा गुलज़ार है।।

इन गलियों में श्याम बसेरा,
है जगह जगह पर कीर्तन,
एक बार जो आता है,
तो संवर जाए है जीवन,
सत्य है इसमें ना कर कोई विचार है,
हाँ विचार है, हाँ विचार है,
खाटू की गलियाँ रहती सदा गुलज़ार है।।

जब श्याम के प्रेमी मिलते,
और जय श्री श्याम है कहते,
रोम रोम खिल जाता,
है दोनों के चेहरे खिलते,
ये प्रेम ही मेरे बाबा को स्वीकार है
हाँ स्वीकार है, हाँ स्वीकार है,
खाटू की गलियाँ रहती सदा गुलज़ार है।।

काशी के भोले भी है,
है मथुरा वाला कन्हैया,
सालासर के बजरंगी,
जो पार करें हर नैया,
इसीलिए तो रहती सदा बहार है,
हाँ बहार है, हाँ बहार है,
खाटू की गलियाँ रहती सदा गुलज़ार है।।

भारत की पावन भूमि,
है राजस्थान की माटी,
भाईचारे का रिश्ता,
है यहीं की ये परिपाटी,
बिछड़े हुए मिलते यहाँ परिवार हैं
हाँ परिवार है, हाँ परिवार है,
खाटू की गलियाँ रहती सदा गुलज़ार है।।

श्याम कृपा उसे मिलती,
जो इन गलियों में आया,
‘गोपाल’ कहे बड़भागी,
वो श्याम शरण है पाया,
ये गलियां ही पहुँचाती हमें दरबार है,
हाँ दरबार है, हाँ दरबार है,
खाटू की गलियाँ रहती सदा गुलज़ार है।।

खाटू की गलियां रहती सदा गुलज़ार है,
इनमे लीले चढ़ घूमे लखदातार है,
इन गलियों में बसता एक नया संसार है,
हाँ संसार है, हाँ संसार है,
खाटू की गलियाँ रहती सदा गुलज़ार है।।

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तर्ज – कब तक चुप बैठे अब तो।

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