खाटू में मोरनी बनके,
मैं तो छम छम नाचूं,
मैं तो छम छम नाचूं,
सांवरिया तेरी याद में,
जोगन बन मैं गाऊं,
खाटु में मोरनी बनके,
मैं तो छम छम नाचूं,
मैं तो छम छम नाचूं।।

खाटू की गलियों में,
श्री श्याम की जलती है ज्योति,
बिन मौसम के बाबा,
अमृत की है वर्षा होती,
प्रेमी बन जो कोई है आता यहाँ,
आकर के भूल गया वो सारा जहाँ,
खाटु में मोरनी बनके,
मैं तो छम छम नाचूं,
मैं तो छम छम नाचूं।।

तुम इतनी किरपा करना,
खाटू बुलाते रहना,
बन माझी नैया को,
भव पार लगाते रहना,
हारे का साथी है कहता ये जहान,
हमने भी मान लिया आकर के यहाँ,
खाटु में मोरनी बनके,
मैं तो छम छम नाचूं,
मैं तो छम छम नाचूं।।

आओ कभी घर बाबा,
भक्ति का है ये मौसम,
तेरे बिना सूना है,
‘संजीव’ के मन का दर्पण,
इक सपना लगता है आना तेरा,
सावरिया तुम आओगे कहता दिल मेरा,
खाटु में मोरनी बनके,
मैं तो छम छम नाचूं,
मैं तो छम छम नाचूं।।

खाटू में मोरनी बनके,
मैं तो छम छम नाचूं,
मैं तो छम छम नाचूं,
सांवरिया तेरी याद में,
जोगन बन मैं गाऊं,
खाटु में मोरनी बनके,
मैं तो छम छम नाचूं,
मैं तो छम छम नाचूं।।

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कृष्ण भजन खाटू में मोरनी बनके मैं तो छम छम नाचूं भजन लिरिक्स
तर्ज – सावन में मोरनी बनके।

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