गुरुजी रा शब्द अमोल खबर पड़ी जिसने लियो रे

गुरुजी रा शब्द अमोल,
खबर पड़ी जिसने लियो रे,
तन मन धन कुर्बान,
गुरुजी पर वार दियो रे,
गुरुजी रा शबद अमोल।।

धड़ से शीश उतार,
गुरुजी रे चरणों धरियो रे,
अब कछु धोखो नाय,
कारज महारो सब ही सरियों रे,
गुरुजी रा शबद अमोल।।

चोंच पंख बिना अंग,
पग बिना गमन कियो रे,
मान सरोवर जाय,
हंस विश्राम लियो रे,
गुरुजी रा शबद अमोल।।

सिंधु ज्यूँ रे अपार,
ब्रह्म निज केवल थयो रे,
क़ेई रे हंसा री धाम,
पुगो सोई मुकत भयो रे,
गुरुजी रा शबद अमोल।।

निज मोती चुग हंस,
गुरुजी म्हाने अमर कियो रे,
जन्म मरण नहीं होय,
ऐसो गुरु ज्ञान दियो रे,
गुरुजी रा शबद अमोल।।

फिर नहीं आऊँ भव माय,
ब्रह्म माही जाय मिल्यो रे,
गुरु सुखराम सा री मेहर,
अटल राम मुकत भयो रे,
गुरुजी रा शबद अमोल।।

गुरुजी रा शब्द अमोल,
खबर पड़ी जिसने लियो रे,
तन मन धन कुर्बान,
गुरुजी पर वार दियो रे,
गुरुजी रा शबद अमोल।।

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राजस्थानी भजन गुरुजी रा शब्द अमोल खबर पड़ी जिसने लियो रे

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