जरा सोचो कन्हैया,
जमाना क्या कहेगा,
तेरे होते हुए भी,
कहीं जाना पड़ेगा,
जरा सोचों कन्हैया,
जमाना क्या कहेगा।।

सिवा तेरे कभी भी,
ना माँगा है किसी से,
मेरी तो हर ज़रूरत,
हुई पूरी तुम्ही से,
कहीं मैं और जाऊं,
तो क्या अच्छा लगेगा,
तेरे होते हुए भी,
कहीं जाना पड़ेगा,
जरा सोचों कन्हैया,
जमाना क्या कहेगा।।

मेरी हस्ती तुम्ही से,
ये सारे जानते हैं,
तुम्हारे नाम से ही,
मुझे पहचानते हैं,
हसे मुझ पर ज़माना,
तुम्हे कैसा लगेगा,
तेरे होते हुए भी,
कहीं जाना पड़ेगा,
जरा सोचों कन्हैया,
जमाना क्या कहेगा।।

कमी मुझमें है कोई,
तभी तो मैं हूँ हारा,
भूलकर दोष मेरा,
मुझे दे दो सहारा,
वरना हारे का साथी,
कौन तुमको कहेगा,
तेरे होते हुए भी,
कहीं जाना पड़ेगा,
जरा सोचों कन्हैया,
जमाना क्या कहेगा।।

जियूं जब तक मैं ‘सोनू’,
ना छूटे साथ तेरा,
सिवा तेरे कहीं भी,
ना फैले हाथ मेरा,
गई जो लाज मेरी,
ये कैसे तू सहेगा,
तेरे होते हुए भी,
कहीं जाना पड़ेगा,
जरा सोचों कन्हैया,
जमाना क्या कहेगा।।

जरा सोचो कन्हैया,
जमाना क्या कहेगा,
तेरे होते हुए भी,
कहीं जाना पड़ेगा,
जरा सोचों कन्हैया,
जमाना क्या कहेगा।।

कृष्ण भजन
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