जिंदगी है मगर पराई है,

दोहा – किचस मेहरबा नसीब से देखो,
या निगाहें अजीब से देखो,
दूर से क्या समझ में आएगा,
जिंदगी को करीब से देखो।

जिंदगी है मगर पराई है,
लोग कांटो की बात करते हैं,
हमने फूलों से चोट खाई है,
हमने फूलों से चोट खाई है,
जिंदगी है मगर परायी है,
लोग कांटो की बात करते हैं,
लोग कांटो की बात करते हैं,
हमने फूलों से चोट खाई है,
हमने फूलों से चोट खाई है,
जिंदगी है मगर परायी है।।

अच्छे-अच्छे ने हमको धोखा दिया,
अच्छे-अच्छे ने हमको धोखा दिया,
तू भी दे दे तू भी दे दे तो क्या बुराई है,
तू भी दे दे तो क्या बुराई है,
जिंदगी है मगर परायी है।।

सारे अपने तो मुझसे रूठ गए,
सारे अपने तो मुझसे रूठ गए,
मेरी किस्मत मेरी तन्हाई है,
मेरी किस्मत मेरी तन्हाई है,
जिंदगी है मगर परायी है।।

लोग हमको तो बुरा कहते ही हैं,
लोग हमको तो बुरा कहते ही हैं,
तू भी कह दे तू भी कह दे,
तो क्या बुराई है,
तू भी कह दे तो क्या बुराई है,
जिंदगी है मगर परायी है।।

जिंदगी है मगर परायी है,
लोग कांटो की बात करते हैं,
हमने फूलों से चोट खाई है,
हमने फूलों से चोट खाई है,
जिंदगी है मगर परायी है,
लोग कांटो की बात करते हैं,
लोग कांटो की बात करते हैं,
हमने फूलों से चोट खाई है,
हमने फूलों से चोट खाई है,
जिंदगी है मगर परायी है।।

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भजन जिंदगी है मगर पराई है गजल लिरिक्स

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