जिसको कहता है मोहन,
ये सारा जहाँ,
हाँ ये सारा जहाँ,
ये बतादो कही तुम,
वही तो नही,
वही तो नही,
जिसको कहता है मोहन।।

शबरी की झोपड़ी मे जो आज कभी,
बैर शबरी ने जिनको खिलाए कभी,
जिनके कैवट ने-२,
पैयाँ पखारे कभी,
ये बतादो कही तुम,
वही तो नही,
वही तो नही,
जिसको कहता है मोहन।।

गोपियो को सताया था जिसने कभी,
कपड़े उनके चुराए थे जिसने कभी,
गोपियो ने-२,
नचाया जिसे रात दिन,
ये बतादो कही तुम,
वही तो नही,
वही तो नही,
जिसको कहता है मोहन।।

उँगली पर जिसने गिरीवर उठाया कभी,
सारथी जो बने अर्जुन के कभी,
जिसकी मुरली-२,
ने सबको रिझाया कभी,
ये बतादो कही तुम,
वही तो नही,
वही तो नही,
जिसको कहता है मोहन।।

जिसको कहता है मोहन,
ये सारा जहाँ,
हाँ ये सारा जहाँ,
ये बतादो कही तुम,
वही तो नही,
वही तो नही,
जिसको कहता है मोहन।।

कृष्ण भजन जिसको कहता है मोहन ये सारा जहाँ भजन लिरिक्स
तर्ज – जिसके सपने हमें रोज़।

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