तेरे दर पे मेरे माधव,
ये शीश झुकाया है,
बाबा हार के आया हूँ मैं,
दर दर का सताया हूँ,
तेरे दर पर मेरे माधव,
ये शीश झुकाया है।।

चौखट पे गया सबकी,
हर मंदिर में भटका हूँ,
आखिर तेरे तोरण पर,
अपना सर रखता हूँ,
सुनता हूँ तेरी रहमत,
दिन रात बरसती है,
बाबा हार के आया हूँ मैं,
दर दर का सताया हूँ,
तेरे दर पर मेरे माधव,
ये शीश झुकाया है।।

जिनसे भी उम्मीदे थी,
उन सबने रुलाया है,
रो रो कर गम पूछे,
हस हस कर उड़ाया है,
विश्वास तुझी पर है,
नैया पार लगानी है,
बाबा हार के आया हूँ मैं,
दर दर का सताया हूँ,
तेरे दर पर मेरे माधव,
ये शीश झुकाया है।।

अब आस तुम्ही से है,
ऐतबार तुम्ही पे है,
‘मयूर’ का सेठ है तू,
अरदास तुम्ही से है,
अश्को के सागर को,
हरी आकर के संभालोगे,
बाबा हार के आया हूँ मैं,
दर दर का सताया हूँ,
तेरे दर पर मेरे माधव,
ये शीश झुकाया है।।

तेरे दर पे मेरे माधव,
ये शीश झुकाया है,
बाबा हार के आया हूँ मैं,
दर दर का सताया हूँ,
तेरे दर पर मेरे माधव,
ये शीश झुकाया है।।

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कृष्ण भजन तेरे दर पे मेरे माधव ये शीश झुकाया है भजन लिरिक्स
तर्ज – एक प्यार नगमा है।

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