बैल री पुकार प्रकाश माली राजस्थानी भजन लिरिक्स

बैल री पुकार,

दोहा – कथा सुनावु आपने,
सुनजो ध्यान लगाय,
बैल री पुकार आ है,
करजो इन पर विचार।

जनम दियो मारी माता मावडी,
आयो गौ माँ रे पेट,
दूध ने दोयो ने चारो नोकीयो,
थोडो करलो विचार,
सुनो नी सायब मारी विनती,
मार्ग वेतो वेगो आव,
देवुला भजना में थाने ओलबो।।

पेला रे जमाना रा मानवी,
फेरता मारे माथे हाथ,
हाथ रे जोडेने जुवारो मांडता,
कहता मनडे री बात,
सुनो नी सायब मारी विनती,
मार्ग वेतो वेगो आव,
देवुला भजना में थाने ओलबो।।

घर रा टाबर ज्यु माने जानता,
नही देता माने गाल,
दिवाली दशहरा ओ माने पूजता,
कर कर मनडे मे चाव,
सुनो नी सायब मारी विनती,
मार्ग वेतो वेगो आव,
देवुला भजना में थाने ओलबो।।

राता पीला करता वे सिंगडा,
गला माई घुंगर माल,
कटिने गया रे वेतो मानवी,
वेतो आवे घणा याद,
सुनो नी सायब मारी विनती,
मार्ग वेतो वेगो आव,
देवुला भजना में थाने ओलबो।।

ऊंची रे चुनाई हवेलीया,
घर में लायो चतुर नार,
घणो रे दौडायो वैरी जान ने,
कर कर मनडे मे चाव,
सुनो नी सायब मारी विनती,
मार्ग वेतो वेगो आव,
देवुला भजना में थाने ओलबो।।

काला रे माया रा लोभी मानवी,
थोडो जीवतो रे जान,
अमे तो नी चाले मारा पावडा,
पावा चल्यो नही जाय,
सुनो नी सायब मारी विनती,
मार्ग वेतो वेगो आव,
देवुला भजना में थाने ओलबो।।

माने तो दौडायो वैरी जोर सु,
लायो मेला रे माय,
लायने बंधाया कडकी धूप में,
नही पानी नही घास,
सुनो नी सायब मारी विनती,
मार्ग वेतो वेगो आव,
देवुला भजना में थाने ओलबो।।

इनरे जमाना रा मानवी,
करे मारे माथे वार,
भाई तो भाई रा माथा काटसी,
देवे बेनड ने गाढ,
सुनो नी सायब मारी विनती,
मार्ग वेतो वेगो आव,
देवुला भजना में थाने ओलबो।।

पेला तो काटी रे वन री झाडीया,
पचे मारीया पंछी ने मोर,
अमे तो मारे बेरी गाय ने,
बैल रा बुरा रे हवाल,
सुनो नी सायब मारी विनती,
मार्ग वेतो वेगो आव,
देवुला भजना में थाने ओलबो।।

झटको लगायो वैरन बिजली,
किना धरती ने प्रणाम,
बैल रे गरीब वाली विनती,
पडजो काल ऊपर जाल,
सुनो नी सायब मारी विनती,
मार्ग वेतो वेगो आव,
देवुला भजना में थाने ओलबो।।

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