मुश्किल की घड़ियो में,
जब नजर ना कुछ आता,
उस वक़्त ये एक ख्याल,
मुझे होंसला दे जाता,
शायद कुछ मेरे लिए,
अच्छा सोच रखा होगा,
मुश्किल की घडियो मे,
जब नजर ना कुछ आता।।

सब के काम होते,
मेरा क्यों ना होता,
दुनिया के तानो से,
दिल मेरा रोता,
शायद इसमें भी तो,
कुछ मेरा भला होगा,
मुश्किल की घडियो मे,
जब नजर ना कुछ आता।।

आएगा कन्हैया,
भरोसा अटल है,
प्रेम सांवरे से,
मेरा प्रबल है,
शायद किसी और का दुःख,
मुझसे ज्यादा होगा,
मुश्किल की घडियो मे,
जब नजर ना कुछ आता।।

श्याम को क्या दोष दूँ,
वो तो सही है,
समर्पण में ‘मोहित’,
कुछ तो कमी है,
शायद बुरे कर्मो का,
कुछ हिस्सा बचा होगा,
मुश्किल की घडियो मे,
जब नजर ना कुछ आता।।

मुश्किल की घड़ियो में,
जब नजर ना कुछ आता,
उस वक़्त ये एक ख्याल,
मुझे होंसला दे जाता,
शायद कुछ मेरे लिए,
अच्छा सोच रखा होगा,
मुश्किल की घडियो मे,
जब नजर ना कुछ आता।।

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