सुन्दर सज़ा दरबार मैया का,
मैं दीवानी हो गई,
मैं दीवानी हो गई, मैया,
मैं दीवानी हो गई,
प्यारा सज़ा दरबार मैया का,
मैं दीवानी हो गई।।

नवरात्रि का त्योहार आया,
भक्त करे तेरा इंतज़ार,
नव दिन मैया का आना और,
मैं दीवानी हो गई,
सुन्दर सज़ा दरबार मईया का,
मैं दीवानी हो गई।।

सिर पे मैया सोने का टीका,
हाथो में कंगना है सज़ा,
कानो में झुमके की लटकन,
मैं दीवानी हो गई,
सुन्दर सज़ा दरबार मईया का,
मैं दीवानी हो गई।।

हे अंबे तेरी लाल चुनरिया,
जिसपे गोटा है लगा,
मैया को चुनरी ओढाना,
मैं दीवानी हो गई,
सुन्दर सज़ा दरबार मईया का,
मैं दीवानी हो गई।।

करती दुर्गे शेर सवारी,
हाथ में त्रिशूल धरा,
उँचे पर्वत भवन मैया का,
मैं दीवानी हो गई,
सुन्दर सज़ा दरबार मईया का,
मैं दीवानी हो गई।।

मैया ने चण्ड मुण्ड को मारा,
महिषासुर का सिर कटा,
दुष्टो का यूँ अंत करना,
मैं दीवानी हो गई,
सुन्दर सज़ा दरबार मईया का,
मैं दीवानी हो गई।।

छत्र नारियल भेट मैया की,
उसपे तेरी लाल ध्वजा,
भक्तो का जयकारे लगाने,
मैं दीवानी हो गई,
सुन्दर सज़ा दरबार मईया का,
मैं दीवानी हो गई।।

नौमी में जीमे नौ कन्याए,
संग में है लंगुरिया,
पूरी हलवे का भोग लगाना,
मैं दीवानी हो गई,
सुन्दर सज़ा दरबार मईया का,
मैं दीवानी हो गई।।

सांची प्रीत है मैया तुम्हारी,
तुम ही हो माता मेरी,
माँ बेटी का रिश्ता पुराना,
मैं दीवानी हो गई,
सुन्दर सज़ा दरबार मईया का,
मैं दीवानी हो गई।।

सुन्दर सज़ा दरबार मैया का,
मैं दीवानी हो गई,
मैं दीवानी हो गई, मैया,
मैं दीवानी हो गई,
प्यारा सज़ा दरबार मैया का,
मैं दीवानी हो गई।।

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तर्ज – सांवली सूरत पे मोहन।

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