Title : मुर्गा-मुर्गी प्यार से देखे
Movie/Album/Film: दो कलियाँ -1968
Music By: रवि
Lyrics : साहिर लुधियानवी
Singer(s): लता मंगेशकर

मुर्गा-मुर्गी प्यार से देखे, नन्हाँ चूज़ा खेल करे
मैं किसको बोलूँ जो मेरे मात-पिता का मेल करे
मुर्गा-मुर्गी प्यार से देखे…

चिड़िया ओर चिड़ा मिलजुल कर दाना-दुनका लाये
अपने छोटे से बच्चे को खोल के चोंच खिलाये
मैं जब अपने भाग को सोचूँ, आँख में आँसू आये
मुर्गा-मुर्गी प्यार से देखे…

साथ के घर का नन्हाँ बच्चा, मात-पिता संग खेले
मेरा बचपन मात-पिता की दूरी का दुःख झेले
कोई मुझे वैसा घर दे दे, महल दो-महलें ले ले
मुर्गा-मुर्गी प्यार से देखे…

बड़ों के आगे बात करें, ये हम बच्चों का काम नहीं
जब तक उनका मन न पिघले, अपने लिए आराम नहीं
उस घर में क्या रहना, जिसमें सीता के संग राम नहीं
मुर्गा-मुर्गी प्यार से देखे…

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