Title – चाँद अपना सफर Lyrics
Movie/Album- शमा Lyrics-1981
Music By- ऊषा खन्ना
Lyrics- जनाब ज़फ़र गोरखपुरी
Singer(s)- लता मंगेशकर

चाँद अपना सफ़र ख़त्म करता रहा
शमा जलती रही, रात ढलती रही
दिल में यादों के नश्तर से टूटा किए
एक तमन्ना कलेजा मसलती रही
चाँद अपना सफ़र…

बदनसीबी शराफ़त की दुश्मन बनी
सज संवर के भी दुल्हन न दुल्हन बनी
टीका माथे पे इक दाग़ बनता गया
मेहंदी हाथों से शोले उगलती रही
चाँद अपना सफ़र…

ख़्वाब पलकों से गिर कर फ़ना हो गए
दो क़दम चल के तुम भी जुदा हो गए
मेरी हारी थकी आँख से रात दिन
एक नदी आँसूओं की उबलती रही
चाँद अपना सफ़र…

सुबह मांगी तो ग़म का अंधेरा मिला
मुझको रोता सिसकता सवेरा मिला
मैं उजालों की नाकाम हसरत लिए
उम्र भर मोम बन कर पिघलती रही
चाँद अपना सफ़र…

चंद यादों की परछाईयों के सिवा
कुछ भी पाया न तनहाईयों के सिवा
वक़्त मेरी तबाही पे हँसता रहा
रंग तक़दीर क्या -क्या बदलती रही
चाँद अपना सफ़र…

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