Chhedo Dhun Matwalo Ki Lyrics-Md.Rafi, Asha Bhosle, Ghar Sansar

Title : छेड़ो धुन मतवालों की
Movie/Album: घर संसार (1958)
Music By: रवि शंकर शर्मा
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले

छेड़ो धुन मतवालों की
बहकी बहकी चालों की
शहर से दूर, नशे में चूर
पिकनिक है, दिलवालों की
छेड़ो धुन मतवालों…

क्या क्या जलवे दिखलाता हूँ, देखो मेरे संग
इसके नैनों का जादू, उसके आँचल का रंग
चली हवा, उड़ी घटा
लम्बी ज़ुल्फों वालों की
छेड़ो धुन मतवालों…

वेदर है प्यार का, हम तुमसे प्यार करना माँगता
मौसम है बहार का, ये दिल भी तुमपे मरना माँगता
बाबूजी की टाँग पे जो धोती है फँसी
छलकी पड़ती है देखो हसीनों की हँसी
नज़र लड़ी, फिसल पड़ी
टोपी टोपीवालों की
छेड़ो धुन मतवालों…

मंडे, ट्यूज़डे, वेडनेज़डे, थर्सडे, फ्राइडे, सैटरडे
छह दिन तक पापड़ बेले, तब आया है संडे
(हॉलिडे हॉलिडे हॉलिडे हॉलिडे)
लगी रहे, सजी रहे
ये महफ़िल गोरे, कालों की
छेड़ो धुन मतवालों…

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