Title – झूठी सच्ची आस पे Lyrics
Movie/Album- बियॉन्ड टाइम -1987
Music By- जगजीत सिंह
Lyrics- काशिफ़ इन्दोरी
Singer(s)- चित्रा सिंह, जगजीत सिंह

झूठी-सच्ची आस पे जीना
कब तक आख़िर, आख़िर कब तक
मय की जगह ख़ून-ए-दिल पीना
कब तक आख़िर, आख़िर कब तक
झूठी-सच्ची आस पे जीना…

सोचा है, अब पार उतरेंगे
या टकरा कर डूब मरेंगे
तूफ़ानों की ज़द पे सफ़ीना
कब तक आख़िर, आख़िर कब तक
झूठी-सच्ची आस पे जीना…

एक महीने के वादे पर
साल गुज़ारा, फिर भी ना आए
वादे का ये एक महीना
कब तक आख़िर, आख़िर कब तक
झूठी-सच्ची आस पे जीना…

सामने दुनिया भर के ग़म हैं
और इधर इक तन्हा हम हैं
सैकड़ों पत्थर, इक आईना
कब तक आख़िर, आख़िर कब तक
झूठी-सच्ची आस पे जीना…

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