आ लौट के आवो जम्भदेव भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
आवो आवो मैं रहूं , आवो जम्भ गुरु जगदीश ।
हिरदा मेरा पवित्र करो , चरण निवाऊँ शीश ।

आ लौट के आओ जम्भ देव ,
तुझे तेरे सन्त बुलाते हैं ।
उनतीस नियम गए भूल ,
तुझे तेरे संत बुलाते हैं ।

सूना पड़ा है गाँव दीपासर ,
सूनी डगरिया सारी ।
सूना जंगल समराथल रा ,
भवन जोत जहाँ सारी ।
कब आवोगे लोवट जी के लाल ,
तुझे तेरे संत बुलाते हैं ।
आ लौट के आओ। …..

धरम धजा थांरी झुकने लागी ,
पाप ने पैर पसारा ।
पाप घटा बण बरसण लागी ,
भरिया पाप रा बेड़ा ।
ज्याँ में डूब रहा संसार ,
तुझे तेरे संत बुलाते है ।।
आ लौट के आओ। …..

चले गए वैकुण्ठपुरी में ,
सूनी पड़ी जम्भ गीता ।
रो रोकर हम तुम्हें पुकारे ,
जैसे लंक में सीता ।
कब धरोगे राम अवतार ,
तुझे तेरे संत बुलाते हैं ।।
आ लौट के आओ। …..

कामक्रोध मदलोभ मोह ने ,
आय चहुँ दिशघेरा ।
हाथ कमण्डल धरकर आवो ,
देवो नामका सहारा ।
गावे जम्भ मण्डल गुणगान ,
मेवाड़ी भजन सुणाते हैं ।।
आ लौट के आओ। …..

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