गुरुजी बिना कोई काम ना आवे भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
गुरु बिन माला फेरते , गुरु बिन करते दान।
गुरु बिन सब निष्फल गया ,बाचो वेद पुरान।

गुरु जी बिना कोई काम न आवे,
कुल अभिमान मिटावे है।
कुल अभिमान मिटावे हो साधो,
अरे सतलोक पहुँचावे है।
गुरु जी बिना कोई काम न आवे।

नारी कहे मैं संग चलूँगी,
ठगनी ठग ठग खाया है।
अंत समय मुख मोड़ चली है,
तनिक साथ नहीं देना है।
गुरु जी बिना कोई काम न आवे।

कौड़ी कौड़ी माया रे जोड़ी,
जोड़ के महल बनाया है।
अंत समय में थारे बाहर करिया,
उसमे रे रह नहीं पाया है।
गुरु जी बिना कोई काम न आवे।

अरे जतन तन कर सुन तो रे बाला,
वाका लाड़ अनेक लड़ाया है,
तन की ये लकड़ी तोड़ी लियो है,
लाम्बा हाथ लगाया है।
गुरु जी बिना कोई काम न आवे।

भाई बंधू थारे कुटुंब कबीला,
धोखे में जीव बंधाया है।
कहे कबीर सुनो भाई साधो,
कोई कोई पूरा गुरु बन्ध छुड़ाया है।
गुरु जी बिना कोई काम न आवे।

गुरु जी बिना कोई काम न आवे,
कुल अभिमान मिटावे है।
कुल अभिमान मिटावे हो साधो,
अरे सतलोक पहुँचावे है।
गुरु जी बिना कोई काम न आवे।

prahlad tipaniya ke bhajan Music video song

गुरुजी बिना कोई काम ना आवे भजन, guruji bina koi kaam nahi aave kabir nirguni bhajan lyrics in hindi
कबीर निर्गुण भजन लिरिक्स
भजन :- गुरु बिना कोई काम न आवे
गायक :- प्रहलाद टिपानिया

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