मनवा राम सुमर ले रे भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
राम भजले प्राणीया ,कर कर मन में सोच।
दुबारा नहीं आवसी थारी मनक जन्म री मोज।।

सुमरिया बिना भक्ति नहीं होवे।
ओजी भव जल घोता खाई रे।
मनवा राम सुमर मेरा भाई रे।

लख चोरासी में भटकत भटकत,
अबके मनुष्य तन पाई रे ।
ऐसो अवसर फेर नहीं आवे।
ओजी आखिर में पछताई ।
मनवा राम सुमर मेरा भाई रे।
सुमरिया बिना भक्ति नहीं होवे।
भव जल घोता खाई ।
मनवा राम सुमर मेरा भाई रे।

विश्वासना माया चक्कर में ,
बार बार भरमाई रे ।
अंत समय जमना ले जावे।
ओजी गणा खरग भुगताई ।
मनवा राम सुमर मेरा भाई रे।
सुमरिया बिना भक्ति नहीं होवे।
भव जल घोता खाई ।
मनवा राम सुमर मेरा भाई रे।

गरु सब्द का वचन बांध ले ,
छोड़ दे ठुमराई रे।
सारा झगड़ा छोड़ जगत का।
ओ प्रभु में ध्यान लगाई।
मनवा राम सुमर मेरा भाई रे।
सुमरिया बिना भक्ति नहीं होवे
भव जल घोता खाई ।
मनवा राम सुमर मेरा भाई रे।

अरे देवा रा मिल्या गुरु पूरा ,
सुमरन सती बढाई रे।
गणपत राम कभी नहीं बिसरू ,
राम नाम गुण गाई ।
मनवा राम सुमर मेरा भाई रे।
सुमरिया बिना भक्ति नहीं होवे।
भव जल घोता खाई ।
मनवा राम सुमर मेरा भाई रे।

मनवा राम सुमर ले रे भजन Manva Ram Sumar Le Re gopal das vaishnav bhajan

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