रुणिचे रा धनिया अजमल जी रा कंवरा भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
जब भार बढ्यो धरती पर , हरी लियो अवतार ।
पापी दुष्टांने मारीया , निकळंक नेजाधार ।।

हे रूणीचे रा धणियाँ ,
अजमाल जी रा कँवरा ,
माता मेणादे रा लाल ,
राणी नेतल रा भरतार ,
म्हारो हेलो ,
सुणो नी रामा पीर जी ॥

घर – घर होवे पूजा थांरी ,
गाँव – गाँव जस गावे जी ।
जो कोई लेवे नाम धणी रो ,
मन चाया फळ पावे जी ।
हे रामसा पीर थारी ,
ड्योढी पर शीश झुकावाँ ,
मनड़े रा फूल चढ़ावाँ ,
हे रूणीचे रा धणियाँ ,
अजमाल जी रा कँवरा ।।

थे तो बाबा मालिक म्हारा ,
म्हे हाँ थारा दास जी ।
म्हां पर किरपा की जो बाबा ,
टाबर अपणा जाण जी ।
श्वारथिया रो जहर उतारो ,
घड़ी पलक री सासा ,
बन्धावो म्हाने आशा ,
हे रूणीचे रा धणियाँ ,
अजमाल जी रा कँवरा ।।

दास करे अरदास पीर जी ,
डसगयो काळो नाग जी ।
मरतोड़ा ने जीव दान दो ,
जीतां ने वरदान जी ।
महिमा अपरम्पार थांरी ,
धन – धन भाग्य विधाता ,
थाने घणी खम्मा अन्नदाता ,
हे रूणीचे रा धणियाँ ,
अजमाल जी रा कँवरा ॥

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