वारी जाऊं रे बलिहारी जाऊ रे भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
सतसंगत घर घर नहीं , नहीं घर घर गणराज।
सिंहन का टोला नहीं ,नहीं चन्दन का बाग़।

वारी जाऊ रे गुरा ,
बलिहारी जाऊ रे।
मारा सतगुरु आंगन आया।
वारी जाऊ रे।

सतगुरु आँगन आया ,
में गंगा गोमती नाया।
मारी निर्मल हो गई काया।
में वारी जाऊ रे।
वारी जाऊ रे गुरा। …..

सतगुरु दर्शन दीना ,
मारा भाग उदय कर दीना।
मारा करम भरम सब छीना।
में वारी जाऊ रे।
वारी जाऊ रे गुरा। …..

सखिया मिल कर आओ ,
केसर रा तिलक लगाओ
गुरु देव ने बधाओ।
में वारी जाऊ रे।
वारी जाऊ रे गुरा। …..

सत्संग बन गई भारी ,
थे गाओ मंगला चारी।
मारी खुली ह्रदय री बारी।
में वारी जाऊ रे।
वारी जाऊ रे गुरा। …..

दास नारायण जस गावे ,
चरणा में शीश झुकावे।
मारो बेड़ो पार लगावो।
में वारी जाऊ रे।

वारी जाऊ रे गुरा ,
बलिहारी जाऊ रे।
मारा सतगुरु आंगन आया।
वारी जाऊ रे।

वारी जाऊं रे बलिहारी जाऊ रे satguru aangan aaya main wari jau vari jau re gura balihari jau re anil nagori bhajan

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