सुन घर सेर सेर घर बस्ती भजन | sun gar ser ser gar basti bhajan lyrics

।। दोहा ।।
पनिहारी पानी भरे , और इढाणी असमान।
गागर में सागर भरियो , सीधा अलख पहचान।

सुन घर सेर सेर घर बस्ती ,
कुण सुत्ता कुण जागा है।
लाल हमारा हम लालन का ,
तन सुता भ्रम जागा है।

जल बीच कमल कमल बीच कलीया ,
भवर वासना लेता जी
पाचो चेला फीर है अकेला ,
अलग अलग वो करता जी।
सुण घर …..

जीवत जोगी माया जोड़ी ,
मरीया माया माणी जी।
खोजया खबर पडे घट बींतर ,
छोगा राम की वाणी है।
सुण घर …..

तप्त कुंड पर तपसी तापे ,
तपसी तपस्या करता है।
साथ लंगोटा कुछ नही रकता ,
लम्बी माला जपता है।
सुण घर …..

जल का मन का पार नही पाया ,
सवा हाथ का धागा है।
तीन लोग का वस्त्र परीया ,
तो ही निर्जन नागी है।
सुण घर …..

एकू अप्सरा आगे उबी ,
दुजी सुरमो सार है।
तीजी अप्सरा सहज बीचावे ,
परणी नहीं कवारी है।
सुण घर …..

परणीया पहली पुत्र जन्मीया ,
मात पीता मन भाया है।
रामा नन्द जी का बणीया कबीरा ,
एक अखंडी काया है।
सुण घर …..

dhanraj joshi ke bhajan | धनराज जोशी के भजन video

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देसी मारवाड़ी भजन hindi lyrics
भजन :- सुन घर सेर सेर घर बस्ती
गायक :- धनराज जोशी

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