मैं हूँ किस्मत की मारी ठोकर खा खा के हारी
मैं हूँ किस्मत की मारी ठोकर खा खा के हारी,घाटे वाले बाबा जी मैंने ले ली शरण तुम्हरी,चरणों में शीश झुकाया मेरी तो कोड़ी हो गई काया।। ये तो मैं भी जानू मन में खोता भाग लिखाया,कौन जन्म का बुरा काम अब मेरे आगे आया रे,धना रे मेरे तन से घोड़ बहे बाबा मेरे मन …