जीने का मज़ा तो बालाजी तेरे संग आया
गफलत में बैठ कर फरियाद तो कर सकता हूजब चाहू तुम्हे याद तो कर सकता हू।। राज जो दया की नज़ारे हम ना पातेभटकते ही रहते दर दर ठोकरे ही खाते।। उठा के ज़ामी से तूने फलक पे बैठायाजीने का मज़ा तो बालाजी तेरे संग आया।। उठा के ज़ामी से तूने फलक पे बैठायाजीने का …