अगर है शौक मिलने का भजन लिरिक्स

अगर है शौक मिलने का ,
तो हरदम लौ लगाता जा ।
जलाकर खुद नुमाई को ,
भस्म तन पर लगाता जा ॥

पकड़कर इश्क का झाडू ,
सफा कर हिजर – ए – दिल को ।
दुई की धूल को लेकर ,
मुसल्लाह पर उड़ाता जा ।।
अगर है शौक । …..

मुसहल्ल फाड़ तसबी तोड़ ,
किताबें डाल पानी में ।
पकड़ तू दस्त फिरस्तों का ,
गुलाम उनका कहाता जा ॥
अगर है शौक । …..

न मर भूखा न रख रोजा ,
न जा मस्जिद न कर सजदा ।
वजू का तोड़ दे कुंजा ,
शराब – ए – शौक पीता जा ।
अगर है शौक । …..

हमेशा खा हमेशा पी ,
न गफलत से रहो इक दम ।
नशे में सैर कर अपनी ,
खुद ही को तू जलाता जा ॥
अगर है शौक । …..

नहीं मुल्ला नहीं ब्राह्मण ,
दुई की छोड़ कर पूजा ।
हुक्म है शाह कलन्दर का ,
अनल – हक तू कहाता जा ।।
अगर है शौक । …..

कहे मंसूर मस्ताना ,
मैंने हक दिल में पहचाना ।
वहीं मस्तों का मैखाना ,
उसी के बीच आता जा ।
अगर है शौक । …..

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भजन :- अगर है शौक मिलने का
गायक :- ओशो सिद्धार्थ औलिया

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