उठ जाग मुसाफिर भोर भई भजन लिरिक्स

उठ जाग मुसाफिर भोर भई ,
अब रैन कहाँ जो सोवत है।
जो सोवत है सो खोवत है ,
जो जागत है सो पावत है।

उठ नींद से अंखियाँ खोल जरा ,
और अपने प्रभु से ध्यान लगा ।
यह प्रीत करन की रीत नहीं ,
प्रभु जागत है तू सोवत है ।
उठ जाग ….

जो कल करना सो आज करले ,
जो आज करना सो अब कर ले ।
जब चिड़ियों ने चुग खेत लिया ,
फिर पछताये क्या होवत है ।
उठ जाग ….

नादान भुगत करनी अपनी ,
ऐ पापी पाप में चैन कहाँ ।
जब पाप की गठरी शीश धरी ,
फिर शीश पकड़ क्यों रोवत है ।
उठ जाग ….

hindi bhajan with lyrics video

उठ जाग मुसाफिर भोर भई, uth jaag musafir bhor bhai, चेतावनी भजन हिंदी में, bhajan hindi lyrics, hindi bhajan with lyrics, lyrics of hindi bhajan
भजन :- उठ जाग मुसाफिर भोर भई
गायक :- राकेश काला

Leave a Reply