ओढ भरम रो भाकलियो भजन लिरिक्स

।। दोहा ।।
हस्ती बांधा थान पे ,लश्कर पड़ी पुकार।
दरवाजा जड़िया रया ,निकल गया असवार।

नर गाफल कैसे सूतो रे ,
ओढ भरम रो भाखलियो ।
मालिक रा गुण गावत गावत ,
एड़ो काँहि आयो थाकलियो ।

सतरी संगत में कबहुँ न बैठे ,
मूरख में मन में नी तेठे ,
ज्यूं ज्यूं पाप घणेरा चेंठे ,
यूँ कयो मानतो नॉय रे ,
थू जहर हळाहळ चाख लियो ॥
ओढ भरम रो भाखलियो
नर गाफल कैसे । …..

मतलब काज दशों दिश भटके ,
उठ परभाते जावे झटके ,
पुण री वेला पैसो अटके ,
सांझ पड्यां सो जाय रे ,
थू फाड़ मुंडे रो बाकलियो ।
ओढ भरम रो भाखलियो
नर गाफल कैसे । …..

कूड़ कपट में राजी बाजी ,
हँस हँस बात बणावे ताजी ,
जनम दियो थारी जरणी लाजी ,
मानखो जनम थें खोय दियो रे ,
घोडो नरक में हाँकलियो ।
ओढ भरम रो भाखलियो
नर गाफल कैसे । …..

राम बिना थारो कोई नी साथी ,
सींग पूंछ कोंधे में टांकी ,
एक बात थारे रहगी बाकी ,
नाथ नी थारे नाक में नहीं तो ,
खूटे नखा दूं खाखलियो ॥
ओढ भरम रो भाखलियो
नर गाफल कैसे । …..

कहे दानाराम सुणो मेरे प्यारे ,
मालिक हिसाब लेवे न्यारे न्यारे ,
होठ कंठ चिप जासी थारे ।
सायब रे थू सन्मुख वेला ,
कठे बतावेला नाकलियो ।
ओढ भरम रो भाखलियो
नर गाफल कैसे । …..

ramniwas rao bhajan video

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भजन :- ओढ भरम रो भाखलियो
गायक :- रामनिवास राव

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